धान क्रय केन्द्र महुली में बारिश के दौरान भीगता धान का बोरा। संवाद
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जिले में मंगलवार को दिन में हुई बारिश से क्रय केंद्रों पर रखा सैकड़ों क्विंटल धान भीग गया। यहां बरसात से बचाव के लिए अफसरों ने कोई इंतजाम नहीं किए थे। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं थी। वहीं, क्रय केंद्रों पर पहुंचे किसान भी अपने धान को भीगने से बचाने के लिए मशक्कत करते दिखे।
जिले में धान खरीदने के लिए 56 क्रय केंद्र खोले गए हैं। लेकिन विभागीय अफसरों ने इन केंद्रों का निर्धारण करने के दौरान इस बात का ध्यान नहीं रखा कि खरीदे गए धान को कहां सुरक्षित रखा जाएगा।
जबकि दो दिन से आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ हो रही थी। इसके बाद भी क्रय केंद्रों के प्रभारी लापरवाह बने रहे। शहर से सटे महुली मंडी परिसर में खुले में रखा धान भीग गया। जो किसान धान लेकर आए थे, वे बारिश से परेशान हो उठे। आनन-फानन धान को सुरक्षित करने के लिए पॉलिथीन की व्यवस्था की। इसके बाद भी काफी नुकसान हो गया।
रानीगंज के शिवगढ़ स्थित क्रयकेंद्र पर भी बदइंतजामी का आलम दिखा। यहां भी बारिश से धान को सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। कुछ पॉलिथीन रखी गई थी, लेकिन पर्याप्त नहीं थी।
इससे किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इससे भी खराब स्थिति रामापुर क्रयकेंद्र की रही। यहां परिसर में दो हजार क्विंटल से अधिक धान खुले में दिनभर भीगता रहा। क्रयकेंद्र प्रभारी लापरवाह बने रहे। मार्केटिंग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश से धान को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया। देर शाम तक केंद्रों पर रखा धान सुरक्षित भी कर लिया गया।
महुली मंडी धान क्रय केन्द्र पर धान लेकर आया किसान भीगने से बचाने के लिए पालीथिन से ढकते हुए। संवा?- फोटो : PRATAPGARH