नगर पालिका व नवसृजित नगर पंचायतों में शामिल गांव के लोगों को दो साल तक गृहकर व जलकर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। शहर में शामिल गांवों में गृहकर व जलकर तभी लागू होगा, जब वहां नगर पालिका व नगर पंचायतों द्वारा नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न करा दी जाएं।
31 दिसंबर 2019 को शासन ने शहर का दायरा बढ़ाते हुए 19 गांवों को नगर पालिका में शामिल कर लिया। इससे नगर पालिका की आबादी बढ़ गई और पालिका को ए श्रेणी की सुविधाएं अप्रैल 2020 से मिलने लगेगी। इसके लिए नगर पालिका व नवसृजित नगर पंचायतें विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव बना रहे हैं। नगर पालिका व नगर पंचायतों में शामिल गांवों का अस्तित्व मार्च माह में समाप्त होने जा रही है। नगर पालिका व नगर पंचायतों में गृहकर व जलकर नागरिकों से वसूला जाता है।
चूंकि नगर पालिका व नगर पंचायतों में शामिल गांवों में अभीे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन पर टैक्स का भार नहीं लादा जाएगा। दो साल तक नगर पालिका और नगर पंचायतों में शामिल गांवों में नागरिकों की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद ही वहां से गृहकर व जलकर वसूला जा सकता है।
नवसृजित नगर पंचायत पृथ्वीगंज के प्रभारी ईओ सुभाषचंद्र का कहना है कि पहले नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद उपविधि बनाकर करों का निर्धारण होगा। इसके बाद ही लोगों से जलकर व गृहकर लिया जाएगा। नगर पंचायत में शामिल गांवों को विकसित करने में समय लगेगा। फिर भी नगर निकाय की गाइड लाइन के मुताबिक ही काम होगा।
भवनों का नक्शा कराना होगा स्वीकृत
नगर पालिका व नगर पंचायतों में शामिल गांवों में अब मकान व दुकान का निर्माण कराने के लिए विनियमित क्षेत्र से नक्शा बनवाना होगा। नक्शा पास होने के बाद ही उतने क्षेत्र में निर्माण कराया जा सकता है। विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता की संस्तुति के बाद ही उपजिलाधिकारी अनुमति देंगे।
मकान व दुकानों का कराना होगा पंजीकरण
नगर पालिका व नगर पंचायतों में शामिल गांवों में स्थित मकान व दुकानों का नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। वैसे तो नगर पालिका व नगर पंचायत के कर्मचारी अपने स्तर से सर्वे कर लोगों के मकान पंजीकृत करेंगे, लेकिन जो छूट जाएंगे। वह खुद अपना आवेदन देकर नगर पालिका व नगर पंचायत में नाम दर्ज करा सकेंगे। सभी के मकानों का पंजीकरण नंबर होगा। जिससे उनकी अलग पहचान होगी।