कार्यकाल खत्म होने के कारण याचिका को बलहीन माना
कोर्ट ने अर्थ भी समझाया कि संसार में चंदन को शीतल माना जाता है, लेकिन चंद्रमा इससे भी अधिक शीतल है। मगर, अच्छे मित्रों का साथ चंद्रमा और चंदन दोनों से अधिक शीतलता देने वाला होता है। कोर्ट ने कहा कि 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है। 17वीं लोकसभा का चुनाव कुछ महीने बाद होना है। याचिका लंबित रहने के दौरान भारतेंद्र सिंह का कार्यकाल 2019 में पूरा हो चुका है। वे अगला चुनाव हार भी गए। ऐसे में याचिका स्वीकार भी कर ली जाए तो इसका कोई विधिक मायने नहीं निकलेगा। अब याचिका बलहीन हो चुकी है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वादी-प्रतिवादी से बातचीत में पाया कि उनके बीच कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। याची इससे दुखी था कि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी होने के बावजूद चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। याची के वकील का कहना था कि चुनाव हुए भले ही काफी समय बीत चुका है, लेकिन कोर्ट के इस निर्णय से समाज और कार्यकर्ताओं के बीच खराब हुई छवि को सुधारा जा सकता है।
अपनी छवि को लेकर चिंतित होना जायज
कोर्ट ने कहा कि याची का अपनी छवि को लेकर चिंतित होना जायज है, क्योंकि सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति हमेशा अच्छी सार्वजनिक छवि व प्रशंसा चाहता है। चुनाव अधिकारी के नामांकन निरस्त करने से उसकी सार्वजनिक छवि यह बनी कि उसने कुछ गैरकानूनी काम किया है या उनके नामांकन फॉर्म में कुछ गड़बड़ थी। हालांकि, चुनाव अधिकारी के आदेश को देखने से यह धारणा सच नहीं लगती है।