कहा गया कि आकस्मिक श्रमिकों से निरंतर कार्य न लिया जाए ताकि भविष्य में वे नियमितीकरण की मांग न कर सकें। आकस्मिक श्रमिकों को कार्य का पारिश्रमिक दिया जाता है। न्यूनतम वेतनमान भत्ते अनुमन्य करना शासकीय नीति के खिलाफ है। यह भी कि यदि किसी अधिकारी ने आकस्मिक श्रमिकों से निरंतर कार्य लिया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।
यह आदेश अलीगढ़ में वन विभाग में कार्यरत इशाक मोहम्मद की याचिका पर दिया गया। याची के अधिवक्ताओं अर्चना श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभा शंकर दूबे केस में वर्ष 2018 में छठा वेतन आयोग का लाभ पा रहे सभी श्रमिकों को प्रतिमाह 18 हजार रुपये वेतनमान देने का निर्देश दिया है। इसका पालन नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा, अपर महाधिवक्ता के बयान के बाद किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है। यदि कुछ है भी तो सक्षम अदालत सुनेगी।