जिले की 1207 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। मगर कार्यकाल बढ़ाने को लेकर शासन ने अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इधर जिला प्रशासन ने 25 दिसंबर के बाद प्रधानों को खाते से बाहर करने की तैयारी कर ली है। फिलहाल जानकारों की मानें तो कार्यकाल बढ़ने के बाद भी प्रधानों को सहखातेदार नहीं बनाया जाएगा।
कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो पा रहा है। चुनाव आयोग जिस प्रकार तैयारी कर रहा है, उससे स्पष्ट है कि मार्च माह के पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। इधर 25 दिसंबर की तिथि नजदीक आते ही प्रधानों की धड़कनें बढ़ती जा रही है।
जिले के प्रधान ब्लाकों और डीपीआरओ कार्यालय पहुंचकर कार्यकाल बढ़ने की जानकारी कर रहे हैं। फिलहाल शासन स्तर से कार्यकाल बढ़ने का आदेश जारी नहीं होने से विभागीय अफसर 25 दिसंबर के बाद प्रधानों को खाते से बाहर करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। जिले के 17 विकास खंडों के एडीओ पंचायतों को ग्राम पंचायतों को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।
विभागीय जानकारों का मानें तो अगर प्रधानों का कार्यकाल बढ़ता भी है, तो भी वह ग्राम पंचायत के खाते में सहखातेदार नहीं बन पाएंगे। अगर सरकार कार्यकाल बढ़ाने के साथ ही प्रधानों को खाते का सहभागी बनाने का पत्र जारी करती है, तभी प्रधानों को सहखातेदार के रूप में रखा जाएगा। ग्राम पंचायतों में प्रशासक की तैनाती होते ही सचिव के साथ एडीओ पंचायत सहखातेदार बन जाएंगे।
निर्माण कार्य पूरा कराने में जुटे प्रधान
जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में इन दिनों पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हो रहा है। कार्यकाल की तिथि नजदीक आते ही निर्माण कार्य को पूरा कराने में जुटे हुए हैं। हालांकि कुछ विवादों में घिरने के कारण अधर में लटक गए हैं।
प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और प्रशासक नियुक्त करने के लिए शासन से अभी कोई पत्र नहीं आया है। मगर जिले के प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में हूं, आदेश आते ही प्रशासक की नियुक्ति की जाएगी।
रवि शंकर द्विवेदी, डीपीआरओ