वर्कशाप में डग ड्राइवर की यदि तैनाती होती तो शायद महिला रोडवेजकर्मी सरला की जान बच जाती। मकैनिक को बस न चलाना पड़ती। मगर इसके बाद भी परिवहन निगम के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। इसके चलते हर समय बस स्टैंड में यात्रियों की जान पर खतरा मंडराता है।
प्रतापगढ़ डिपो के पास निगम की 53 बसें हैं। बस स्टेशन परिसर में ही बस मरम्मत के लिए वर्कशाप भी बनाया गया है। मरम्मत के बाद बस जांच करने के लिए वर्कशाप के पास कम से कम तीन डग ड्राइवर की तैनाती होनी चाहिए, मगर प्रतापगढ़ बस स्टैंड के वर्कशाप में एक भी डग ड्राइवर नहीं है। ऐसे में मरम्मत के बाद बस चलाकर मकैनिक जांच करते हैं। जिसका खामियाजा यह रहा है कि सप्ताहभर पहले बस स्टेशन परिसर में महिला रोडवेजकर्मी सरला को निगम की बस ने रौंद दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद भी अफसरों ने डग ड्राइवर की तैनाती नहीं की। इससे बस स्टेशन पर आने वाले यात्रियों के जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
कौन होते हैं डग ड्राइवर
वर्कशाप में डग ड्राइवर की तैनाती होती है। बस मरम्मत के बाद ब्रेक का प्रेशर चेक करना होता है। थोड़ी दूर बस चलाकर यह देखना होता है कि उसमें कोई दिक्कत तो नहीं है। इनको अलग से प्रशिक्षण दिया जाता है। मॉडल बस स्टैंड कहे जाने वाले प्रतापगढ़ बस अड्डा के वर्कशाप में एक भी डग ड्राइवर की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में मकैनिक बस मरम्मत करने के बाद जांच करने के लिए थोड़ी दूर बस चलाते हैं। जबकि उनके पास लाइसेंस भी नहीं होता है।
दो चालकों की ड्यूटी डग ड्राइवर के रूप में वर्कशाप में लगाया गया है। एक पद रिक्त है। जिस दिन बस स्टैंड में हादसा हुआ उस दिन डग ड्राइवर अवकाश पर था।
- पीके कटियार, एआरएम।