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प्रतापगढ़ : राजाभैया को कड़ी टक्कर देकर चर्चा में आए गुलशन यादव, ओबीसी वर्ग का विश्वास जीतने में रहे सफल

अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 13 Mar 2022 05:16 AM IST

सार

राजाभैया ने अबकी बार डेढ़ लाख पार का नारा दिया था जो ईवीएम खुलने के बाद ध्वस्त हो गया। राजाभैया का सीधा मुकाबला सपा के गुलशन यादव से रहा। गुलशन यादव को हार जरूर मिली लेकिन कड़ी टक्कर देने के कारण वह चर्चा में आ गए हैं।
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Prayagraj News : गुलशन यादव और राजाभैया। - फोटो : प्रयागराज

कुंडा विधानसभा से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया को पहली बार इतनी कड़ी टक्कर मिली। यह पहली मौका है जब वह इतने कम अंतराल से चुनाव जीते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में राजाभैया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को एक लाख से अधिक रिकॉर्ड मतों से पराजित किया था।



राजाभैया ने अबकी बार डेढ़ लाख पार का नारा दिया था जो ईवीएम खुलने के बाद ध्वस्त हो गया। राजाभैया का सीधा मुकाबला सपा के गुलशन यादव से रहा। गुलशन यादव को हार जरूर मिली लेकिन कड़ी टक्कर देने के कारण वह चर्चा में आ गए हैं। कुंडा नगर पंचायत के चेयरमैन रह चुके गुलशन यादव की पत्नी भी वर्तमान में कुंडा की नगर पंचायत अध्यक्ष हैं। इनके भाई छविनाथ यादव सपा के जिलाध्यक्ष, मां और भाभी वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। 





कुंडा के लोगों की मानें तो सपा ने लड़ाई को पिछड़े वर्ग के सम्मान से जोड़ने का प्रयास, जिसमें वह काफी हद तक सफल रहे, लेकिन राजाभैया की लोकप्रियता के चलते उन्हें उतनी कामयाबी नहीं मिल सकी जितनी की उन्होंने उम्मीद की थी। मतगणना शुरू होने के बाद एक समय गुलशन यादव राजाभैया से दो राउंड तक आगे चलते रहे।



हालांकि बाद में राजाभैया भारी पड़ते गए, लेकिन उतना अंतर नहीं बना सके जितने की उन्होंने और उनके समर्थकों ने उम्मीद की थी। कड़े मुकाबले में राजाभैया को 30 हजार 418 मतों से जीत मिली लेकिन गुलशन यादव को मिले मतों ने हर किसी को चौंकाने के लिए विवश कर दिया। कभी राजाभैया के खासमखास रहे गुलशन यादव को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया था। 

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Prayagraj News : गुलशन यादव और राजाभैया। - फोटो : प्रयागराज
कुंडा विधानसभा से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया को पहली बार इतनी कड़ी टक्कर मिली। यह पहली मौका है जब वह इतने कम अंतराल से चुनाव जीते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में राजाभैया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को एक लाख से अधिक रिकॉर्ड मतों से पराजित किया था।



राजाभैया ने अबकी बार डेढ़ लाख पार का नारा दिया था जो ईवीएम खुलने के बाद ध्वस्त हो गया। राजाभैया का सीधा मुकाबला सपा के गुलशन यादव से रहा। गुलशन यादव को हार जरूर मिली लेकिन कड़ी टक्कर देने के कारण वह चर्चा में आ गए हैं। कुंडा नगर पंचायत के चेयरमैन रह चुके गुलशन यादव की पत्नी भी वर्तमान में कुंडा की नगर पंचायत अध्यक्ष हैं। इनके भाई छविनाथ यादव सपा के जिलाध्यक्ष, मां और भाभी वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। 



कुंडा के लोगों की मानें तो सपा ने लड़ाई को पिछड़े वर्ग के सम्मान से जोड़ने का प्रयास, जिसमें वह काफी हद तक सफल रहे, लेकिन राजाभैया की लोकप्रियता के चलते उन्हें उतनी कामयाबी नहीं मिल सकी जितनी की उन्होंने उम्मीद की थी। मतगणना शुरू होने के बाद एक समय गुलशन यादव राजाभैया से दो राउंड तक आगे चलते रहे।



हालांकि बाद में राजाभैया भारी पड़ते गए, लेकिन उतना अंतर नहीं बना सके जितने की उन्होंने और उनके समर्थकों ने उम्मीद की थी। कड़े मुकाबले में राजाभैया को 30 हजार 418 मतों से जीत मिली लेकिन गुलशन यादव को मिले मतों ने हर किसी को चौंकाने के लिए विवश कर दिया। कभी राजाभैया के खासमखास रहे गुलशन यादव को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया था। 

Prayagraj News : राजाभैया - फोटो : प्रयागराज
जीत का अंतर
30,418

किसको कितने मिले वोट
रघुराज प्रताप सिंह             जनसत्ता दल 99261
गुलशन यादव                     सपा 68843
सिंधुजा मिश्रा                      भाजपा 16347
योगेश यादव                            कांग्रेस 542
फहीम बसपा                                    3321



आठवीं बार विधानसभा में पहुंचने में रहे सफल
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने पहली बार अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा था। अभी तक वह निर्दलीय के रूप में सात बार से चुनाव लड़ते और जीतते आ रहे थे। इसके पहले सपा ने उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारती थी। तीन चुनाव के बाद सपा ने जब उनके खिलाफ उनके ही करीबी रहे गुलशन यादव को मैदान में उतारा तो मुकाबला रोमांचक हो गया। अखिलेश यादव ने कुंडा में अपनी चुनावी सभा में कुंडा में कुंडी लगाने की बात कहकर राजाभैया को चुनौती दी तो राजाभैया ने पलटवार करते हुए अखिलेश को करारा जवाब दिया था। 

Pratapgarh News : गुलशन यादव, सपा प्रत्याशी कुंडा विधानसभा। - फोटो : प्रतापगढ़
कुंडा राजा भैया का अभेद्य किला क्यों?
प्रतापगढ़ जिले की कुल सात विधानसभा सीटों में से एक कुंडा सीट राजा भैया की वजह से हमेशा चर्चा में रहती है। 

कुंडा विधानसभा सीट से रघुराज प्रताप सिंह यानी राजा भैया लगातार 1993 से यहां निर्दलीय विधायक हैं। 

कहा जाता रहा है कि प्रदेश में सत्ता किसी की भी रही हो, कुंडा की सत्ता राजा भैया के पास ही रही। 

कहा जाता है कि अब तक भाजपा और सपा से उन्हें समर्थन मिलता रहा, इसलिए कुंडा में उनका जनाधार मजबूत होता चला गया।

वे दूसरी जातियों के युवाओं में भी लोकप्रिय रहे। वे दावा करते हैं कि वे अपनी क्षेत्र की जनता के प्यार की बदौलत चुनाव जीतते हैं। 

उनका राजनीतिक करियर ऐसा रहा है कि वे कुंडा से कभी चुनाव नहीं हारे। 

अपने क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ की वजह से ही इस चुनाव में भी भाजपा के प्रचंड लहर में उनकी सीट बेअसर रही।

जीत के बाद प्रमाण पत्र प्राप्त करते कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया। - फोटो : प्रतापगढ़
कुंडा में हराना मुश्किल?
उन्हें भदरी रियासत का राजकुमार कहा जाता है जिन्हें कुंडा में हराना बहुत मुश्किल है।

सपा से नजदीकी के कारण पिछले डेढ़ दशक से सपा कुंडा में राजा भैया के समर्थन में कोई प्रत्याशी नहीं उतारती रही।

माना गया कि वे इस वजह से भी हर बार आसानी से कुंडा सीट से चुनाव जीतते रहे। 

तीन दशक में पहली बार सपा ने उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा। इस वजह से राजा भैया के लिए चुनौती पैदा हुई। 

इस सीट पर सपा ने उनके करीबी रहे गुलशन यादव को चुनावी मैदान में उतारा था। 

कुंडा सीट पर रघुराज के सियासी तिलस्म को तोड़ने के लिए सपा ने अपना प्रत्याशी यहां खड़ा किया। 

इस बार वे अपनी पार्टी जनसत्ता दल से ही कुंडा से चुनाव लड़े और सातवीं बार यहां से जीत गए।

हालांकि इस चुनाव में वे महज 30 हजार वोटों से जीते हैं, इसलिए कहा जा रहा है कि उनकी सियासी बादशाहत कम हो गई।

राजा भैया को जहां 99,612 वोट मिले वहीं सपा के गुलशन यादव को 69,297 वोट प्राप्त हुए हैं।

उनकी जीत का अंतर पहले 60,000 से 80,000 वोटों के बीच रहा है। 

2012 के चुनाव में तो यह 88,000 वोटों को पार कर गया था, जो कि प्रदेश में सबसे ज्यादा है।

वे हर चुनावों में अपनी जीत का मार्जिन बढ़ाते रहने को लेकर चर्चित रहे हैं। पर इस बार वे अपना पुराना रिकॉर्ड बचाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं।

Prayagraj News : रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया। - फोटो : प्रयागराज
बाहुबली की छवि
राजघराने से ताल्लुक रखने वाले राजा भैया की कथित तौर पर बाहुबली की छवि है। हालांकि राजा भैया खुद को बाहुबली मानने से इनकार करते हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक राजा भैया के खिलाफ प्रतापगढ़ के कुंडा और महेशगंज पुलिस थाने के साथ-साथ प्रयागराज, रायबरेली और राजधानी लखनऊ में हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, अपहरण समेत अन्य संगीन धाराओं के तहत कुल 47 मामले दर्ज हैं।

2007 में दिए उनके हलफनामे के मुताबिक उनके ऊपर 4 मुकदमे दर्ज थे। जबकि 2012 में उनके ऊपर 8 मुकदमे दर्ज थे। 2017 से 2022 तक राजा भैया पर सिर्फ एक मुकदमा है।


करोड़ों की संपत्ति के मालिक
वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कुंडा स्थित बेंती किला किसी सपने से कम नहीं है।

इस साल नामांकन के दौरान चुनाव आयोग को दिए राजा भैया के हलफनामे के मुताबिक वे 15 करोड़ 78 लाख 54 हजार 38 रुपये के मालिक हैं। 

वहीं साल 2017 में राजा भैया की संपत्ति 14 करोड़ 25 लाख 84 हजार 83 रुपये थी।

उनके पास साढ़े 3 किलो सोना, 26 किलो चांदी है। वहीं, पत्नी के नाम 4 किलो सोना,10 किलो 509 ग्राम चांदी है।

योगी राज में उनकी कमाई की रफ्तार काफी कम रही है। 2017 से 2022 के बीच उनकी संपत्ति सिर्फ डेढ़ गुना रफ्तार से ही बढ़ी है।

जबकि 2012 से 2017 के बीच उनकी कमाई दो गुना बढ़ गई।

Pratapgarh News : नामांकन पत्र दाखिल करने जाते राजाभैया। - फोटो : प्रतापगढ़
सत्ता का स्वाद चखा
राजा भैया भले ही अब तक निर्दलीय चुनाव लड़ते रहे हों लेकिन उन्होंने सत्ता का स्वाद कई बार चखा। भाजपा की कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, रामप्रकाश गुप्ता से लेकर सपा के मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री बने थे। हालांकि 2017 में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन कर आए तो राजा भैया इस सरकार का हिस्सा नहीं रहे।


राजा भैया अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव दोनों की ही सरकारों में मंत्री रहे हैं। लेकिन साल 2018 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव और राजा भैया के बीच के रिश्ते बिगड़ गए। जिसके बाद राजा भैया ने अपनी खुद की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक बना ली।
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