जिले के 21 अस्पतालों में मरीजों का सरकारी खर्च पर इलाज होगा। पीपीपी (प्राइवेट पार्टनर प्रोजेक्ट) योजना के तहत ऐसे अस्पताल को चिन्हित कर उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। इससे प्रसव के लिए परेशान होने वाली गर्भवती महिलाओं का प्राथमिकता के आधार पर इलाज हो सकेगा।
डिप्टी सीएम तथा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने मरीजों की सहूलियत के मद्देनजर प्राइवेट अस्पताल में सरकारी खर्च पर उनका इलाज कराने का आदेश दिया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तैयारी में जुट गया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल के 21 प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने सरकार के साथ मिलकर संचालन का निर्णय लिया है।
सीएमओ के आदेश पर अपर शोध अधिकारी ने ऐसे अस्पतालों का डाटा तैयार कर शासन को भेजा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मार्च से इन प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का सरकारी खर्च पर इलाज शुरू हो जाएगा। इससे मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी।
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक यदि मरीजों को परेशान करते हैं तो मरीज प्राइवेट में अपना इलाज करा सकता है। मरीज के पीछे आने वाला खर्च सरकार वहन करेगी। हालांकि इन अस्पतालों में आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी के मुताबिक शासन के निर्देश पर डाटा तैयार कर लखनऊ भेजा गया है। जांच के बाद सब ठीक मिला तो इन अस्पतालों को पीपीपी मोड के तहत स्वास्थ्य विभाग से जोड़ा जाएगा।