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बूस्टर डोज लगवाने से कतरा रहे फ्रंटलाइन वर्कर्स

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जिले में फ्रंटलाइन वर्कर्स कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। पांच दिनों के भीतर जिले में फ्रंटलाइन वर्कर्स के मुकाबले बुजुर्गों को दोगुनी डोज दी जा चुकी है।
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जिले में स्वास्थ्य और पुलिस कर्मचारियों समेत 12 हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स को बूस्टर डोज देने के लिए चिह्नित किया गया है। दूसरी तरफ दो हजार बुजुर्गों केे भी वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जानी है।
हेल्थ ओर फ्रंटलाइन वर्कर्स कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने से कतरा रहे हैं। उनके मुकाबले बूस्टर डोज लेने को लेकर बुजुर्गों में ज्यादा उत्साह है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बारह हजार के सापेक्ष अभी तक महज पांच सौ फ्रंट लाइन वर्कर्स को बूस्टर डोज दी जा सकी है।
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बुजुर्गों की बात किया जाए तो चिह्नित दो हजार में से पांच सौ बुजुर्गों ने अब तक टीका लगवा लिया है। बूस्टर डोज लेने में फ्रंटलाइन वर्कर्स पीछे चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बूस्टर डोज उन लोगों को ही दी जा रही है जिन्हें कोरोना टीके की दूसरी डोज लिए नौ महीने का वक्त बीत चुका है। बूस्टर डोज भी उसी कंपनी की ही दी जाएगी, जिसका पहले टीका लगवाया गया है।
26 जनवरी को दस आशा बहुएं और प्रधान होंगे सम्मानित
कोरोना टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की मदद करने वाली आशा बहुओं और प्रधानों को जिला प्रशासन 26 जनवरी को सम्मानित करेगा। अपने गांव में शत प्रतिशत टीकाकरण कराने वाली आशा बहुओं और प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। सीडीओ ईशा प्रिया ने इसकी जिम्मेदारी सीएमओ को दी है।
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