पिता विजय सिंह और बेटा विकास सिंह राणा।
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'मुझे रख दिया छांव में, खुद जलते रहे धूप में, मैंने देखा है ऐसा एक फरिश्ता, अपने पिता के रूप में... ये पंक्तियां हर पिता के रूप को बखूबी बयां करती हैं। पिता खुद दर्द सह लेंगे, लेकिन अपने बच्चों को उस दर्द का अहसास तक नहीं होने देंगे। ऐसा एक बार फिर साबित किया है कुंडा के चौसा के रहने वाले विजय सिंह ने। इन्होंने अपने बेटों को किडनी देकर नई जिंदगी दी हैं।
विकास खंड कुंडा चौसा गांव निवासी विजय सिंह के तीन बेटे विकास सिंह राणा, आकाश सिंह राणा व अविनाश सिंह राणा है। बड़े बेटे विकास सिंह की वर्ष 2013 में तबीयत खराब हो गई चेकअप के दौरान किडनी फेलियर का पता चला तो पैरों तले जमीन खिसक गई। मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले विजय सिंह के लिए यह खबर सिर पर पहाड़ टूटने जैसी थी। डाक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। कुछ दिनों तक डायलिसिस के बाद एसजीपीजीआई लखनऊ में किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई।
फरवरी 2014 में मां रेखा सिंह ने किडनी देकर बेटे को नया जीवन दिया। इसके बाद सब कुछ ठीक चलने लगा। वर्ष 2023 में विकास की फिर तबीयत खराब होने पर चेकअप कराया गया तो पता चला कि मां द्वारा दी गई किडनी भी खराब हो चुकी हैं। यह खबर सुनकर विकास ने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी, लेकिन विजय सिंह ने हिम्मत देते हुए कहा कि अभी वह जिंदा। उनके जीवित रहते बेटे को कुछ नहीं हो सकता। दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में फिर से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई। 10 सितंबर 2023 को पिता विजय सिंह ने बेटे को किडनी देकर नई जिंदगी दी।
पूरा परिवार साथ खड़ा रहा
विजय सिंह ने बताया कि बीमारी से जूझते हुए परिवार एकजुट रहा। डायलिसिस व किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान आवाजाही में आर्थिक समस्या जरूर आड़े आई, लेकिन परिवार के साथ ने सभी चुनौतियों को पार किया। उन्होंने कहा कि किडनी देने के लिए पूरा परिवार तैयार था।