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Pratapgarh News: 16 घंटे बाद छत से उतरा बेटी को बंधक बनाने वाला पिता

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लाखीपुर कप्सा गांव में बेटी को बंधक बनाकर छत पर मौजूद पिता को उतारने में पुलिस को 16 घंटे बाद कामयाबी मिली। पिता द्वारा की जा रही पत्थरबाजी के कारण कोतवाली के एक दरोगा रमिल कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए। सीओ पट्टी आनंद राय के समझाने पर मंगलवार की भोर सुबह साढ़े तीन बजे पिता बेटी के साथ नीचे उतरा तो पुलिस ने राहत की सांस ली।
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इलाके के लाखीपुर कप्सा गांव निवासी श्याम प्रसाद गौतम अपने घर में ही किराना की दुकान चलाता है। इस बीच पत्नी सावित्री देवी से विवाद हुआ तो वह अपने मायके चली गई। दो दिन से श्याम प्रसाद अपनी 20 वर्षीय बेटी निशा देवी के साथ छत पर चला गया। जब धूप होती तो वह उसे इस धूप में ही लिटा दे रहा था। उसकी बेटी बुखार से पीड़ित थी, लेकिन उसका इलाज नहीं करा रहा था। इसकी जानकारी मां सावित्री को हुई तो वह भी मायके से आई और सूचना पुलिस को दे दी। सोमवार 11 बजे फायर ब्रिगेड के एसआई आदर्श कुमार, पट्टी थाने की फोर्स मौके पर पहुंची। श्याम प्रसाद से बात करने का प्रयास किया गया तो वह गाली देते हुए पत्थर फेंकने लगा। जब रात होने लगी तो फायर ब्रिगेड की टीम ने रेस्क्यू करने का प्रयास किया। 6 दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे लेकिन आरोपी ऊपर से लगातार पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, किसी तरह छह दरवाजे तोड़कर रेस्क्यू टीम दूसरे तल पर पहुंच गई, लेकिन हालात ऐसे हो गए कि दूसरे तल पर पहुंची रेस्क्यू टीम के लोग ना तो ऊपर जा पा रहे थे और ना ही नीचे उतर पा रहे थे। क्योंकि श्याम प्रसाद अपनी बेटी के साथ छत के तीसरे तल पर मौजूद था और लगातार सीढ़ी से ऊपर चढ़ रहे और नीचे उतर रहे लोगों पर पत्थर से हमला कर रहा था। रेस्क्यू टीम के साथ गांव के कई युवा भी द्वितीय तल तक पहुंच गए थे। वह भी वहां फंसे हुए थे। लगातार अपने घर परिवार और साथियों को फोन कर बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे। रात 2:30 बजे तक सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीण पत्थर से बचने के लिए खुद को चारपाई के पीछे छिपते नजर आए। श्याम प्रसाद गौतम लगातार ग्रामीण और पुलिस कर्मियों पर पत्थर फेंक रहा था। ग्रामीणों की माने कोतवाली के एक दरोगा समेत कई पुलिसकर्मी पत्थर से घायल हो गए। सुबह साढ़े तीन बजे सीओ आनंद कुमार राय ने किसी तरह समझाकर उसे नीचे उतारा। पुलिस श्याम प्रसाद गौतम और बेटी निशि को इलाज के लिए सीएचसी ले गई। वहां से जिला अस्पताल उपचार के लिए भेजा गया।
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