जिले को भले ही खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है, लेकिन सरकारी विद्यालयों के बच्चों को अभी भी शौच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। स्कूलों में शौचालय बने जरूर हैं, लेकिन उनमें कहीं ताला लटक रहा है तो कहीं प्रयोग करने के लायक नहीं हैं। सफाई कराने से बचने के लिए शिक्षकों ने शौचालयों में ताला जड़ दिया है। वह सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए शौचालयों का ताला खोलते हैं। सोमवार को कुंडा इलाके में शौचालय में ताला बंद होने के कारण ही शौच के लिए बाहर गए छठी कक्षा के छात्र की नाले में डूबने से मौत हो गई थी। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जिले के सरकारी विद्यालयों में शौचालयों की हकीकत खंगाली तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।
सदर विकास क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल कोहड़ा में शौचालय तो बना है, मगर उसे बच्चों के प्रयोग करने पर मनाही है। इसलिए हमेशा ताला लगा रहता है। सदर विकास क्षेत्र के मिडिल स्कूल शंकरपुर के शौचालय का ताला कभी नहीं खुलता है। नगर क्षेत्र के राजकीय कन्या प्राइमरी पाठशाला पुरानामाल गोदाम में शौचालय बना ही नहीं है। प्राइमरी स्कूल बलीपुर प्रथम में शौचालय के सामने दबंगों के अवैध कब्जा करने से बच्चों को दूसरे के घरों में शौच करने जाना पड़ता है।
शिवगढ़ विकास खंड के प्राइमरी स्कूल बभनमई में तीन शौचालय बने हैं, मगर दो शौचालयों में लगे ताले में जंग लगा है। जिसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्षों से ताला नहीं खुला है। एक शौचालय का ताला अध्यापिकाओं के लिए रिजर्व है। इस शौचालय में किसी भी बच्चे को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। गांव में तैनात सफाई कर्मचारी कभी स्कूल की सफाई करने नहीं आता है।
संडवा चंद्रिका विकास खंड के प्राइमरी स्कूल बधुमार में ताला बंद मिला, जबकि सरायदली प्राइमरी स्कूल का शौचालय टूटा-फूला मिला। सांगीपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल शुकुलपुर द्वितीय में शौचालय के सामने लकड़ी रखकर रास्ता बंद कर दिया गया है, तो प्राइमरी स्कूल देऊ म पश्चिम के शौचालय में दरवाजा ही नहीं है। प्राइमरी स्कूल शुकुलपुर प्रथम के शौचालय में ताला बंद रहता है। इससे बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। आश्चर्य की बात यह रही कि सोमवार को हथिगवां इलाके के पूर्व म ाध्यमिक विद्यालय बिसहिया के कक्षा छह के छात्र हिमांशु श्रीवास्तव की मौत के बाद भी स्कूल के शिक्षक नहीं चेते और मंगलवार को भी शौचालयों में ताला लगाए रखा।
कौन करेगा शौचालयों की सफाई
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बने शौचालयों की सफाई का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है। अध्यापकों की मानें तो बच्चे जब प्रयोग करते हैं तो शौचालय गंदा हो जाता है। ऐेसे में शौचालय की सचफाई कौन करे। इसे लेकर काफी ऊहापोह की स्थिति रहती है।
स्कूलों में शौचालय का निर्माण बच्चों के प्रयोग के लिए हुआ है। अगर कोई अध्यापक ताला बंद रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जिले के सभी शिक्षकों को इस आशय का पत्र भी निर्गत किया गया है।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।