प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अति महात्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिले के निजी अस्पताल आयुष्मान का मान नहीं बढ़ा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था के चलते लाभार्थी इस योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के सात निजी अस्पतालों को चुना गया है, लेकिन मरीजों का इलाज करने से ये अस्पताल हाथ खड़े कर दे रहे हैं। अधिकांश मरीज सरकारी अस्पतालों में ही भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को भर्ती करने में जिले की रैंकिंग प्रदेश में 32 वें नंबर पर पहुंच गई है।
केंद्र की मोदी सरकार ने 25 सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया था। वर्ष 2011 में हुई आर्थिक सामाजिक जनगणना के आधार पर जिले के एक लाख 52 हजार 113 हजार परिवारों को इसमें शामिल किया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये तक कैशलेश उपचार देने के लिए 27 सरकारी व 7 प्राइवेट अस्पतालों को संबद्ध किया गया है।
बीच में रैंक के मामले में प्रतापगढ़ 17वें स्थान पर आ गया था, मगर इन दिनों बीएलई कार्य नहीं कर रहे हैं। आरोग्य मित्र गांव-गांव आयुष्मान गोल्डेन कार्ड बनाने जा रहे हैं। इससे कुछ संख्या घट गई है। पखवारे भर के अंदर इस रैंक को ठीक कर लिया जाएगा। आज भी मंडल में प्रतापगढ़ पहले स्थान पर है। प्रदेश में 32वीं रैंक पर है। डॉक्टर सुधाकर सिंह, प्रोग्राम मैनेजर आयुष्मान भारत