रुक्मिणी के भाई रुक्म मित्र शिशुपाल से अपनी बहन का रिश्ता तय कर दिया। जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण को द्वारिका श्रीकृष्ण के पास संदेश लेकर भेजा। पत्र में लिखा कि रीति के अनुसार हमारे कुल में वधु को गिरिजा दर्शन के लिए बाहर जाना पड़ता है। मैं गिरिजा के मंदिर जाऊंगी। आप वहां पहुंचकर मुझे स्वीकार कर लें। नहीं तो मैं अपने प्राणों का त्याग कर दूंगी। अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्म व शिशुपाल के विरोध के बावजूद रुक्मिणी का हरण करके उनसे विवाह किया।
उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार गोपियाें के संग भी विवाह किया था। प्रसंग में उन्होंने भगवान कृष्ण के पौत्र अनुरुद्ध का हरण और पुंडरीक आसुर के वध का भी वर्णन किया। कथा के समापन पर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शुक्रवार को जगन्नाथ स्वामी का महाप्रसाद भोज होगा।
रामपुर खागल में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बृहस्पतिवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री भी दोपहर करीब तीन बजे पहुंचे। उन्होंने हिंदू राष्ट्र के संकल्प को दोहराया। वह सीधे गुरु रामभद्राचार्य का आशीष लेने उनके पास गए। दोपहर 3:30 बजे उनके साथ मंच पर पहुंचे। उन्होंने हिंदुओं को एक रहने की शपथ दिलाई। देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का संकल्प दिलाया।
कहा, मेरे गुरु भाई रामचंद्र दास ने आज रामपुर खागल में महाकुंभ लगा दिया है। शाम 4:32 बजे वह कथा स्थल से रवाना हो गए। धीरेंद्र शास्त्री की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ रामपुर खंगाल गांव में सुबह नौ बजे से ही पहुंचना शुरू हो गई थी। धूप में भक्त घंटों कतार लगाए उनके इंतजार में खड़े रहे।