विभागीय अफसर जिलेभर में चल रहे अवैध कोचिंग सेंटर की पहचान नहीं कर सके। जबकि शहर में 35 से अधिक कोचिंग सेंटर बिना पंजीयन के चल रहे हैं। 17 ब्लॉकों में बिना पंजीयन के 500 से अधिक कोचिंग सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। इसके बावजूद नोडल अफसर कार्रवाई से दूरी बनाए हुए हैं।
डीआईओएस ने कोचिंग सेंटर की जांच के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रवक्ताओं को ब्लॉक स्तर नोडल बनाया है, लेकिन जांच में लापरवाही के कारण बिना पंजीयन के कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
शहर के भंगवाचुंगी रोड, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पीछे, कटरा रोड, सदर बाजार समेत अन्य जगहों पर बिना पंजीयन के कई कोचिंग सेंटर चल रहे हैं लेकिन इनकी जांच तक नहीं की जाती है।
कोचिंग सेंटर के संचालन को लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जून में सभी डीआईओएस को पत्र जारी गाइडलाइन का पालन कराने का निर्देश दिया था। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को एडमिशन नहीं देने, कोचिंग संस्थान द्वारा किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी नहीं देने, स्नातक से कम योग्यता के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करने, किसी अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की नियुक्ति नहीं करने, टेस्ट से पहले डिफिकल्टी लेवल के बारे में विद्यार्थियों को बताना, मेंटल हेल्थ के लिए वर्कशॉप, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं जैसे मुहैया होना अनिवार्य किया गया है।
शहरी क्षेत्र और ब्लॉक स्तर पर कोचिंग सेंटर की जांच के नोडल अफसर बनाए गए हैं। नियमित जांच कर बिना पंजीयन कोचिंग सेंटराें पर कार्रवाई की जाएगी। नियम विरुद्ध चल रहे कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई की जाएगी।
ओमकार राणा, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोचिंग पंजीयन के लिए अनिवार्य शर्तें
-बेसमेंट, जर्जर भवन, टिन शेड और कच्चे भवन नहीं होने चाहिए
-अग्निशमन यंत्र जरूरी
- हवादार, खिड़की और दो रास्ते वाले कक्ष
-छात्र-शिक्षक पंजीयन रजिस्टर
-फीस रसीद रजिस्टर
- 16 साल से कम आयु के बच्चों का पंजीयन न हो