यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने टीजीटी के 17,735 पदों पर रिक्तियां निकाली है। इस बार नई नियमावली से भर्ती होनी है। इससे हजारों अभ्यर्थियों में आक्रोश हैं। वहीं, पहली बार यूपी टीईटी की अनिवार्यता की गई है। इससे हजारों युवा परेशान हैं।
अभ्यर्थियों ने पुरानी नियमावली से भर्ती कराने की मांग है। उनका कहना है कि बीएड धारकों के लिए टीजीटी और पीजीटी ही सहारा है। अगर उसमें भी टीईटी अनिवार्यता और नेगेटिव मार्किंग होगी तो मुश्किलें बढ़ेंगी।
वर्जन
0 बीएड करने के बाद टीजीटी भर्ती ही सहारा था। ऑनलाइन कोचिंग कर तैयारी कर रही थी। इस बार से टीईटी परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। आयोग को इसे खत्म करना चाहिए। पुरानी नियमावली से भर्ती होनी चाहिए। - मीनू, कंधई
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0 नई नियमावली में कई संशोधन किए गए हैं। नेगेटिव मार्किंग होने से कई अभ्यर्थियों को नुकसान होगा। टीईटी की अनिवार्यता ने बीएड डिग्री धारकों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। विज्ञापन से पहले टीईटी खत्म करने का आदेश दिया जाना चाहिए। - श्रुतिकीर्ति मिश्रा, किशुनगंज
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0 टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रयागराज में प्रदर्शन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की गई है। बीएड करने के बाद नौकरी मिलने की उम्मीद जगी थी। नई नियमावली ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। - विपिन शर्मा, सदर बाजार
श्रुतिकीर्ति मिश्रा
श्रुतिकीर्ति मिश्रा