लालगंज। स्थानीय कस्बे की सड़कों से अतिक्रमण हटाए जाने के डीएम के आदेश को तहसील प्रशासन ने ठेंगा दिखा दिया है। प्रशासन का अभियान बैठक, मुनादी और विज्ञप्ति तक सिमट कर रह गया है। कई सालों से जाम के झाम से जूझ रहे लोगों को आखिरकार अतिक्रमण से निजात कब मिलेगी।
लालगंज कस्बे की सड़कों पर अतिक्रमण के चलते राहगीरों और छात्रों के साथ आम लोगों को कई वर्षों से जाम से जूझना पड़ रहा है। कुछ दिनों से जिले में अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा है। जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने यहां की सड़कों पर अतिक्रमण देखा तो वह बिफर गए थे। डीएम ने नाराजगी जताते हुए तहसील प्रशासन को कस्बे से अतिक्रमण हटवाए जाने का निर्देश दिया। डीएम ने दो टूक कहा कि सप्ताह भर में लालगंज की सड़कों पर से अतिक्रमण नहीं हटा तो अफसरों की खैर नहीं। लेकिन तहसील प्रशासन ने जिलाधिकारी के निर्देश ठेंगा दिखा दिया है।
अनदेखी के चलते अतिक्रमण हटाने का अभियान फुस्स हो गया। अतिक्रमण हटाने के लिए तहसील प्रशासन ने व्यापारियों के साथ बैठकें की और कस्बे में मुनादी कराने के बाद इससे मुंह मोड़ लिया। अधिकारियों की फटकार से बचने के लिए प्रशासन ने अखबारों में विज्ञप्ति जारी कर अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी पूरी कर डाली। कोतवाली में उपजिलाधिकारी इद्रासन वर्मा व सीओ सीताराम ने व्यापारियों के साथ बैठक क र सहयोग मांगा। इतना सब करने के बाद भी तहसील प्रशासन कस्बे से अतिक्रमण हटवाने का साहस नहीं कर सका।
लालगंज कस्बे के इंदिरा चौक से शहर मुख्यालय, रायबरेली, कालाकांकर व सांगीपुर की ओर चार सड़कें जाती हैं। इंदिरा चौक जहां रोडवेज बसों के चालकों ने मनमानी करते हुए वाहनों को खड़ा करने का अड्डा बना रखा है, वहीं डग्गामार वाहन भी चौक से ही सवारियां भरते हैं। पुलिस वाले डग्गामार वाहनों को कुछ दिनों के लिए हटा देते हैं। पर प्रशासन के सामने असली समस्या तो रोडवेज बसों के ठहराव को चौक से रोकना है।