जलस्तर नीचे खिसकने से जिले में पीने के पानी का संकट गहरा गया है। कुएं और तालाब सूख गए हैं तो हैंडपंप जवाब दे गए हैं। प्रधान अपने करीबियों के हैंडपंपों का रीबोर करा रहे हैं, मगर सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों के लिए बजट का रोना रो रहे हैं।
भूगर्भ विभाग ने जिले के बारह विकास खंडों को पहले ही डार्कजोन घोषित कर दिया था। इधर अप्रैल माह में भूगर्भ विभाग ने दावा किया था कि जलस्तर 08-15 फीट नीचे खिसक गया है। जिले में पर्याप्त बरसात नहीं होने से कुएं और तालाब पहले से ही सूखे पड़े थे।
प्यास मिटाने के लिए ग्रामीण इलाकों में एकमात्र साधन बने इंडिया मार्का द्वितीय हैंडपंप भी खड़े हो गए हैं। इससे पीने के पानी का संकट गहरा गया है। जिले में कितने हैंडपंप खराब पड़े हैं, इसका सही आंकड़ा तो किसी विभाग के पास नहीं है, मगर डीपीआरओ कार्यालय की मानें तो लगभग 24,789 हैंडपंप खड़े हो गए हैं।
इसमें से अधिकांश हैंडपंप सदर, संडवा चंद्रिका, मानधाता, सांगीपुर, मंगरौरा, बेलखरनाथधाम, लक्ष्मणपुर, मंगरौरा, आसपुरदेवसरा, पट्टी, गौरा, शिवगढ़ विकास खंडों में अधिक हैं। इन इलाकों में नहरों की संख्या तो बहुत कम है। इससे पानी बरसात के दिनों में ही दिखाई पड़ता है।
भीषण गर्मी से परेशान पशु-पक्षी भी प्यास बुझाने के लिए बेहाल हैं। सीडीओ ने पूर्व में ही प्रधानों से तालाबों में पानी भराने और हैंडपंपों का रीबोर कराने को कहा था। मगर आलम यह है कि करीबियों के हैंडपंप का रीबोर कराया जा रहा है, जबकि स्कूलों, पंचायत भवनों पर लगे हैंडपंपों का रीबोर कराने के लिए बजट का रोना रो रहे हैं।
शहर के हैंडपंपों को ठीक कराने की नहीं हो रही पहल
गांव की बात तो दूर रही शहर में लगे हैंडपंप महीनों से पानी देना बंद कर दिए हैं। अंबेडकर चौराहे पर दहिलामऊ उपकेंद्र के सामने लगा हैंडपंप, कचहरी में डीएम कार्यालय के सामने लगा हैंडपंप, जिला अस्पताल में लगा हैंडपंप, तहसील परिसर में लगा हैंडपंप महीनों से पानी नहीं दे रहा है। मगर नगर पालिका कर्मियों की नजर नहीं पड़ रही है।
जो हैंडपंप खराब पड़े हैं, उनका रीबोर कराने के लिए प्रधानों को पहले ही कहा जा चुका है। हैंडपंप रीबोर कराने का अधिकार प्रधानों को दे दिया गया है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी है तो अविलंब ठीक कराएं। अगर कोई प्रधान ठीक नहीं करा रहा है तो बीडीओ से शिकायत करें।
सुदामा प्रसाद, प्रभारी सीडीओ और डीडीओ।