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लाटरी के नाम पर भी झांसा देकर फर्जी खातों में रुपयेे मंगाता था संजय

Wed, 28 Mar 2018 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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terror funding
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आतंकियों को फंडिंग के आरोप में पकड़ा गया संजय सरोज जल्द अमीर बनने के चक्कर में कई सालों से लोगों को फोन पर लाटरी निकलने का झांसा देकर फर्जी खातों में रुपये मंगाता था। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद की कर्नलगंज पुलिस ने 2013 में उसे जेल भेजा था। 2017 में किसी मामले में बिजनौर पुलिस भी उसकी तलाश में आई थी, लेकिन वह हाथ नहीं लग सका था। इसके अलावा पुलिस चौकी में तोड़फोड़ व बवाल करने के मामले में भी नगर कोतवाली में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
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नगर कोतवाली के भगेसरा निवासी संजय सरोज छह साल पहले प्रतापगढ़ आकर पैर जमाने लगा। पहले आंवले का कारोबार किया। फिर लकड़ी कटवाई। फिर लाटरी निकलने का झांसा देकर लोगों से रुपये ठगने का कारनामा करते हुए आतंकियों की फंडिंग करने लग गया। इलाहाबाद जिले के कर्नलगंज थाने के इंस्पेक्टर राकेश सिंह व दरोगा संजय शर्मा ने 9 दिसंबर 2013 को उसे गिरफ्तार किया था। उसके साथ सुलतानपुर के चांदा निवासी विनोद सरोज और नगर कोतवाली के औवार निवासी उमेश उपाध्याय को भी पकड़ा था।

उस समय इलाहाबाद पुलिस ने बताया था कि तीनों लोगों को लाटरी खुलने के जाल में फंसाते हैं। उनसे फर्जी खातों में रुपये मंगाते हैं और बाद मेें उस खाते से रकम निकाल लेते हैं। उस समय पुलिस को तीनों के पास से 49 एटीएम, 6 मोबाइल और एक चेकबुक मिली थी। पूछताछ में तीनों ने लाटरी खुलने का झांसा देने का तरीका बताया था। 2013 में संजय सरोज के ऊपर नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें पुलिस चौकी पृथ्वीगंज में तोडफ़ोड़, पुलिसकर्मियों से अभद्रता व हाईवे जाम का आरोप था।
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उसके साथ 35 लोग नामजद व 250 अज्ञात लोग शामिल थे। पिछले साल फरवरी में बिजनौर पुलिस भी संजय को खोजते हुए पृथ्वीगंज भगेसरा आई थी। कई दिनों तक पुलिस भटकती रही। पृथ्वीगंज पुलिस संजय सरोज का पता बताने के बजाए बिजनौर पुलिस को गुमराह करती रही। बाद में बिजनौर पुलिस ने उसका घर खोज निकाला। पुलिस कार्रवाई की नोटिस चस्पा कर लौट गई। सूत्रों की मानें तो जिले की क्राइम ब्रांच ने संजय को पिछले साल गिरफ्तार किया था। एटीएम व खातों को हैक करने के मामले में जेल भेजा था, लेकिन गहराई से छानबीन पुलिस नहीं कर सकी।

पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ग्रामीणों ने किया था प्रदर्शन
नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज में वर्ष 2013 में हुई घटना में पुलिस के मुकदमा लिखने के विरोध में ग्रामीणों ने मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। अधिकारियों का घेराव करते हुए लोगों ने जांच कराने की मांग की थी। हालांकि मुकदमा तत्कालीन नगर कोतवाल योगेंद्र सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक राधेश्याम सिंह ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था।

संजय की करतूत से वाकिफ थे परिजन
नगर कोतवाली के पृथ्वीगंज भगेसरा निवासी संजय सरोज के करतूत की परिजनों को जानकारी थी। मां के साथ ही भाइयों को भी संजय के गलत काम मालूम थे, लेकिन रुपये की चकाचौंध के कारण उसके हर खून माफ थे। बुधवार को भी घर पर मौजूद महिलाएं बाहर निकलने से बचती रहीं। रिश्तेदारी से मिलने के लिए कुछ लोग जरूर पहुंचे।

एटीएस ने ओमप्रकाश व सुधाकर को बनाया गवाह
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज व नीरज मिश्रा को जेल भेजने वाली एटीएस ने ईंट भट्ठा मजदूर ओमप्रकाश और गारंटर सुधाकर तिवारी को सरकारी गवाह बना लिया है। ओमप्रकाश का एसबीआई की टाइनी शाखा भगेसरा में खाता खुलवाने वाले राजापुर औवार के युवक की तलाश में एटीएस लगी हुई है। हालांकि उसके खाते में कितनी रकम आई, यह उसे अभी तक नहीं मालूम है।

नगर कोतवाली के पृथ्वीगंज भगेसरा निवासी संजय सरोज व नीरज मिश्रा को एटीएस ने आतंकियों को फंडिंग करने के आरोप में जेल भेजा था। बाद में सभी आरोपियों को रिमांड पर लिया। संजय के साथ नगर कोतवाली के राजापुर औवार से उठाए गए ईंट भट्ठा मजदूर ओमप्रकाश वनवासी और चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी को यभी ऱ्एटीएस अपने साथ ले गई थी। जहां सभी से गहनता से पूछताछ की गई। मंगलवार को ही सुधाकर को एटीएस ने छोड़ दिया था।

बुधवार की शाम एटीएस की टीम ओमप्रकाश को घर तक पहुंचाने आई। टीम में शामिल सदस्य राजापुर औवार के उस युवक के घर की ओर भी गए, जिसने ओमप्रकाश को सरकारी योजना का 1 हजार रुपये हर माह मिलने का लालच देकर बैंक में खाता खुलवाया था। हालांकि वह घर से फरार है। सूत्रों की मानें तो ओमप्रकाश का खाता उसके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने एसबीआई की भगेसरा टाइनी शाखा में खुलवाया था। खाता खुलवाने के दौरान नीरज मिश्रा भी मौजूद था और उन लोगों ने सुधाकर को बुलाकर गारंटर बना लिया था।

खाता खुलवाने के बाद उसका एटीएम व पासबुक रखने के साथ ही मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड व फोटो भी रख लिया। वह पड़ोसी युवक से अपना आधार कार्ड व पहचान पत्र मांगने पहुंचा, लेकिन उसे हमेशा टरका दिया जाता था। ओमप्रकाश व सुधाकर की मानें तो दोनों को एटीएस ने सरकारी गवाह बना लिया है। फिलहाल दोनों के घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।

मजदूर के खाते से 15 हजार रुपये नीरज मिश्रा ने निकाले थे
टेरर फंडिंग के आरोप में पकड़े गए नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज निवासी संजय सरोज और नीरज मिश्रा से पूछताछ के दौरान ओमप्रकाश व सुधाकर का भी आमना-सामना कराया गया। सूत्रों की मानें तो पूछताछ के दौरान नीरज मिश्रा ने बताया कि ओमप्रकाश के खाते से उसने केवल 15 हजार रुपये ही निकाले हैं। उसके खाते में कितनी रकम आई और उसे कितनी बार में निकाला गया, यह राज एटीएस ही जान रही है। जिसे किसी को नहीं बताया गया। जबकि पासबुक और एटीएम कार्ड दोनों संजय के पास रखा मिला।

संजय को पहचानता था, नहीं थी बातचीत
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज को ईंट भट्ठा मजदूर ओमप्रकाश वनवासी पहचानता था, लेकिन उससे कभी बातचीत नहीं हुई थी। पूछताछ में उसने सच्चाई बताई। सभी का सामना भी कराया गया।

सुधाकर का मोबाइल एटीएस के कब्जे में
नगर कोतवाली के चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी का मोबाइल एटीएस ने अपने कब्जे में ले रखा है। पूछताछ के बाद उसे सोमवार की देर रात रिश्तेदारों के हवाले कर दिया गया। ताकि मंगलवार को उसकी परीक्षा न छूटे। शर्त यह रखी गई कि जब भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, वह हाजिर होगा।
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