जिला जेल में बंदियाें की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। आपराधिक मामलों में तो लोग जेल भेजे ही जा रहे हैं सजा पाने वाले कैदियों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। सजा पाने वालाें को सेंट्रल जेल जाने से रोक के कारण जेल की व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। जिला जेल की क्षमता 458 बंदियाें की है, लेकिन यहां 710 लोग निरुद्ध हैं। इसमें 166 सजायाफ्ता हैं।
वर्ष 1885 में बनी जिला जेल में महिला, अस्पताल सहित कुल 12 बैरकें हैं। जेल की क्षमता 458 तय की गई थी। इसी लिहाज से इसमें बंदियों के रहने की व्यवस्था हुई। हालांकि यहां पिछले कई साल से क्षमता से अधिक बंदियों को रखा जा रहा है। सजा पाने वालाें को सेंट्रल जेल ट्रांसफर करने की दशा में कुछ भार कम हो जाता था लेकिन पिछले कुछ दिनाें से सेंट्रल जेल भी फुल होने की दशा में जिलाजेल से कैदियाें को वहां भेजने पर रोक लगा दी गई। इससे सजा पाने वाले यहीं रुकने लगे। इस जेल में सजायाफ्ता बंदी गिनती के रहते थे लेकिन यहां इस समय 166 लोग सजा पाने वाले रह रहे हैं।
जेल में बैरकों की हालत पहले से ही खराब है। शौचालय आदि को लेकर बंदी आए दिन शिकायतें करते रहते हैं। ऐसे में बंदियाें के लगातार बढ़ते बोझ से कारागार प्रशासन को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय नेे बताया कि सेंट्रल जेल में भी संख्या अधिक होने के कारण ट्रांसफर पर रोक लगी है। बंदी लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि उनकी सुविधा का पूरा ध्यान दिया जा रहा है।