प्रतापगढ़। शहर और गांव में झोला लेकर टहलने वाले फर्जी पशु डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। पशुओं का गलत इलाज कर पशुपालकों के लिए मुसीबत बनने वाले ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। पशुपालन विभाग के पैरावेट भी अगर पशुओं का इलाज करते हुए मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी वही कार्रवाई होगी, जो फर्जी डॉक्टरों के साथ होगी।
शासन ने पहली बार जिले के प्राइवेट पशु चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया है। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में कोई भी प्राइवेट पशु चिकित्सक ऐसा नहीं है, जिसने विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया हो। मगर अप्रशिक्षित डाक्टर शहर और गांव में पशुओं का इलाज कर मोटी कमाई कर रहे हैं। अप्रशिक्षित पशुमित्र (पैरावेट) को कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, मगर यह पशुमित्र भी पशुओं का उल्टा-सीधा इलाज कर अपनी जेब भर रहे हैं। इसलिए शासन ने साफ तौर पर कहा है कि अगर कोई पशुमित्र पशुओं का इलाज करते हुए मिलता है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। फर्जी पशुचिकित्सकों को चिह्नित करने के लिए सीवीओ, एसडीएम, ड्रग इंस्पेक्टर के साथ ही तीन अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल किए गए हैं।