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जीत-हार पर लाखों का 'सियासी सट्टा'

Mon, 27 Feb 2017 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सट्टा बाजार
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सियासी धमाचौकड़ी समाप्त होने के बाद सट्टेबाजी का बाजार गर्म हो गया है। जिले के कई बाजारों में प्रत्याशी के जीत-हार पर दांव लग चुका है। सियासी सट्टे में लाखों रुपए की बाजी लगी है। हर प्रत्याशी पर मतदान की चर्चा के आधार पर पैसा लगा है। इस सट्टे में शहर के कुछ युवा व्यापारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

सट्टेबाजों को मौका मिलना चाहिए वे दांव लगाने में पीछे नहीं रहते। शहर और गांव के कुछ बड़े बाजारों में यह स्थिति ज्यादा ही है। अभी दो दिन पहले ही मतदान समाप्त हुआ है। सारी ईवीएम स्ट्रांग रूम में जमा है। कौन जीतेगा और कौन हारेगा यकीन के साथ यह कह पाना काफी मुश्किल है। सट्टा बाजार में यह कमाई का जरिया बन गया है। भाजपा-अद संयुक्त प्रत्याशी, कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा प्रत्याशी की जीत-हार को लेकर दांव लग चुका है। शहर के स्टेशन रोड, ठठेरी बाजार, जेल रोड व जोगापुर में तगड़ा सट्टा लगा है। सट्टेबाजों ने यहां सिर्फ दो लोगों पर दांव लगाया गया है। सबसे अधिक जिले की विश्वनाथगंज, सदर, रानीगंज व पट्टी विधानसभा को सटोरियों ने चुना है। प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की जीत पर लाखों रुपये का सट्टा लगा बैठा है। सूत्र बताते हैं कि एक-एक प्रत्याशी के ऊपर कई  लोगों ने पैसा लगाया है।  सट्टे पर लगा दांव का पैसा दोनों पक्षोंके विश्वसनीय व्यक्ति के पास जमा है।
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11 मार्च को मतगणना के बाद जीत-हार का मामला पता चलेगा। तय हुआ है कि परिणाम आने के दो घंटे बाद जीतने वाले प्रत्याशी पर सट्टा लगाने वाली टीम को हारने वाले उम्मीदवार के पक्ष के लोगों का पैसा मिल जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सियासी सट्टा जिले के बड़े बाजार जैसे पट्टी, विश्वनाथगंज, मानधाता, रानीगंज में भी लगा है। सट्टाबाजार में किसका दांव सटीक बैठता है अब यह आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल सट्टेबाज रोज मतदान के दौरान माहौल और मत प्रतिशत को लेकर प्रत्याशियों के जीतहार का आंकलन करने में
जुटे हैं। इस बाबत एएसपी पश्चिमी ने बताया कि हो सकता है कोई चोरी चुपके हार जीत का सट्टा लगा रहा हो लेकिन ऐसा कोई भी मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। ऐसा है तो वह मामले को दिखवा रहे हैं।

हार- जीत का गुणा भाग कर रहे प्रत्याशी और समर्थक

विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद थकान मिटा रहे प्रत्याशी और उनके समर्थक अब हार जीत का गुणा भाग लगाने में व्यस्त हैं। कौन सी बिरादरी का किसे समर्थन मिला और कौन सी बिरादरी उनके साथ रही। इन बातों पर मंथन करने के बाद समर्थक अपने प्रत्याशी की जीत पक्की मानकर चल रहे हैं।
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जिले के मतदाताओं ने 23 फरवरी को अपने मताधिकार का प्रयोग कर 87 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला किया। चुनाव संपन्न होने के बाद से ही प्रत्याशी एकांतवास में पहुंच गए। वे बंद कमरों में अपने करीबियों के साथ संपन्न हुए मतदान को लेकर सुबह से शाम तक चाय की चुस्कियों के बीच मंथन करने में जुटे हैं। सूत्रों की मानें तो हार जीत की चर्चा के दौरान इस बात पर खास जोर दिया जा रहा है कि कौन सी बिरादरी ने किस प्रत्याशी को अधिक प्रतिशत में मत दिया है। इससे किसे नुकसान होगा और किसे फायदा। गुणा भाग करने के बाद प्रमुख दलों के प्रत्याशी खुद को जीता हुआ मान रहे हैं। चुनाव परिणाम जानने के लिए व्याकुल प्रत्याशियों ने अपने खास सिपहसालारों को बुला लिया था। वहां से वापस होने के बाद सिपहसालार समर्थकों के साथ बैठकर जीत हार पर चर्चा करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि शहर व ग्रामीण अंचल के अधिकांश मतदाताओं ने चुनाव संपन्न होने के बाद भी चुप्पी साध रखी है  जबकि समर्थक अपने तर्कों से बाजारों व कस्बों में अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को जीता बता रहे हैं।

 
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