डीआईओएस कार्यालय के नाम पर एक व्यक्ति ने नकल का ठेका लेने के बाद दर्जनभर छात्र-छात्राओं का भविष्य खराब कर दिया है। आरोप है कि बोर्ड परीक्षा के लिए इंटर व हाईस्कूल के दर्जनभर छात्र-छात्राओं से रुपये ऐंठने के बाद उसने फर्जी प्रवेश पत्र थमा दिया। उसने खुद को डीआईओएस कार्यालय का संविदाकर्मी बताया। छात्र-छात्राएं जब परीक्षा देने के लिए परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे तो उन्हें वहां से फर्जी प्रवेश पत्र होने की बात कहकर लौटा दिया गया। आरोपी बाबू अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर फरार हो गया है। ऐसा ही एक फर्जी प्रवेश पत्र ‘अमर उजाला’ के भी हाथ लगा है।
शहर के अजीत नगर निवासी संजय मौर्य उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का केंद्र चलाते हैं। मदाफरपुर के रहने वाले दो व्यक्तियों ने उनसे हाईस्कूल और इंटर के छात्र-छात्राओं का दाखिला कराने की बात कही थी। साथ ही कालेज न जाने व परीक्षा के दौरान नकल कराने की भी शर्त रखी थी। संजय का आरोप है कि शहर के भदरी हाउस निवासी एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि वह डीआईओएस कार्यालय में संविदाकर्मी है। उसने कुल पंद्रह छात्र-छात्राओं का दाखिला कराने के साथ परीक्षा में नकल कराने का ठेका लिया था। इनमें कुछ बच्चे दसवीं तो कुछ बारहवीं के थे। संजय की बेटी भी इसमें शामिल थी। उनके मुताबिक संविदाकर्मी ने एडमिशन के साथ नकल कराने का ठेका लेते हुए इंटर के लिए 12 हजार और हाईस्कूल के लिए आठ-आठ हजार रुपये की वसूली की थी।
साल भर इंतजार करने के बाद जब परीक्षा का समय आया तब छात्र-छात्राओं के परिजनों ने कर्मचारी से मुलाकात की। कर्मचारी ने जीएचएसएस रसोलपुर विद्यालय देवसरा में छात्र-छात्राआें का दाखिला होने की बात बताई। साथ ही परिजनों को विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित प्रवेश पत्र भी थमा दिया। जिस पर परीक्षा केंद्र का नाम एससीबीएसजेएम जीजीआईसी आसपुर देवसरा लिखा था। छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब वह परीक्षा देने परीक्षा केंद्र पहुंचे तो वहां के शिक्षकों ने उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि यहां उनका परीक्षा केंद्र नहीं है। उनका आरोप है कि उन्होंने संस्थागत प्रवेश कराने के लिए कहा था, लेकिन प्रवेश पत्र में प्राइवेट लिखा था। परिजनों ने आरोपी से संपर्क करने का प्रयास किया तो मोबाइल स्विच आफ बताने लगा।