30 नवंबर का दिन ओमप्रकाश कसौधन के परिवार के लिए किसी कलंक से कम नहीं रहा। इस दिन ने ओमप्रकाश के घर का चिराग बुझा दिया। खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। हंसता खेलता परिवार एक पल में बिखर गया। बताया गया कि गुटखा के बड़े पैक में कूपन निकलते हैं। जिनको जमा करने पर कंपनी की तरफ से उपहार भेंट किया जाता है। परिजनों के अनुसार अमित के पास काफी संख्या में कूपन जमा हो गए थे।
वह उनको जमा करना चाहता था, मगर मौका ही नहीं मिला। कंपनी वालाें ने बताया कि कूपन जमा करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर है। उसके बाद कूपन जमा करने का कोई फायदा नहीं है। वैसे तो अमित सोमवार को ही जाता था। मगर इस बार ऐसा संयोग बना कि 30 नवंबर को भी सोमवार पड़ा। तड़के कूपन और रुपये बैग और अटैची में डालकर वह अबुल हसन के साथ इंटरसिटी पकड़ने के लिए निकल पड़ा। अभागे अमित को क्या मालूम था कि जिस अंतिम तारीख को वह कूपन जमा करने जा रहा है वह दिन नियति ने उसकी मौत के लिए मुकर्रर किया है।