जिलाधिकारी आवास के सामने शराब कंपनी के कैशियर से हुई तीन लाख की लूट में पुलिस के हाथ तीसरे दिन भी खाली रहे। पुलिस की उम्मीदें तब धूमिल हो गईं जब जांच के दौरान पता चला कि घटना के समय डीएम आवास में लगा सीसीटीवी कैमरा बंद था। अब पुलिस को यूको बैंक के सीसीटीवी फुटेज से ही कुछ सुराग मिलने की उम्मीद है। शराब कंपनी के कैशियर से गुरुवार की शाम बाइक सवार तीन बदमाशों ने जिलाधिकारी आवास के सामने तमंचे के बल पर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। बदमाश बैग में रखे तीन लाख रुपये और तीन चेक लेकर भागने में कामयाब रहे। तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ लुटेरे नहीं लगे और न ही उनका कोई सुराग लगा। पुलिस ने पूछताछ के लिए कई संदिग्धों को उठाया, लेकिन उनसे भी कामयाबी नहीं मिली।
चूंकि घटनास्थल के सामने ही जिलाधिकारी का आवास है। आवास के बाहर का दृश्य देखने के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है। ऐसे में कोतवाली पुलिस को उम्मीद थी कि जिलाधिकारी आवास पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से बदमाशों का हुलिया पता चल सकता है। कोतवाल हरिपाल सिंह यादव ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि घटना के समय कैमरा बंद था। अब पुलिस को मीराभवन से लेकर बस डिपो तक पड़ने वाले यूकों बैंक, कालेज व दूसरे संस्थानों की सीसीटीवी फुटेज का ही सहारा है। शनिवार को पुलिस यूको बैंक पहुंची, लेकिन बैंक बंद मिला। कालेज में भी अवकाश हो गया था। कोतवाली पुलिस का तर्क है कि बदमाश मीराभवन चौराहे से ही कंपनी के कैशियर का पीछा कर रहे थे और मौका मिलते ही घटना को अंजाम दे दिया। अंबेडकर चौराहे तक बदमाशों को देखा गया है। इसके बाद वह किस दिशा में भागे, इसका पता नहीं चल पा रहा है। पुलिस का कहना है कि बदमाश पुलिस लाइन, बस डिपो या फिर पुलिस चौकी के सामने से भागे होंगे।