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प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा!

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प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा!
शूटर की तलाश में रातभर होती रही छापेमारी, जेल पर गड़ी रही एसटीएफ की निगाहें
संदिग्ध से पूछताछ के बाद हत्या की कड़ी जोड़ने में जूटी पुलिस, लगातार एसपी की निगरानी में चल रही पूछताछ
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जेल के प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जिससे पुलिस अधीक्षक लगातार पूछताछ कर रहे हैं। उससे पूछताछ के बाद पुलिस घटना की कड़ी जोड़ने में जुटी हुई है। शूटर की तलाश में पुलिस ने संभावित स्थानों पर दबिश दी, लेकिन पहुंचने के पहले ही उसने अपना ठिकाना बदल दिया था। शनिवार को जेल में निरुद्ध बंदियों व उनसे मिलने जुलने वालों का ब्योरा एसटीएफ खंगालती रही।
जेल में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की गुरुवार की शाम जेल रोड क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने के बाद दोनों नकाबपोश बदमाश कंधई की ओर भाग निकले थे। दो दिन से लगातार कोतवाली व स्वाट टीम संदिग्ध बदमाशों की धरपकड़ में जुटी हुई थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसी लूटने वाले बदमाशों से पूछताछ के बाद पुलिस को प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने वाले शूटरों व उनके मददगारों के बारे में जानकारी लग गई। पुलिस ने घटना में शामिल एक बदमाश को दबोच लिया। उसे कर्रा करने पर यह पता चला कि प्रधान बंदीरक्षक की हत्या किसने की। उसे ही हत्या का राज भी मालूम है। पुलिस ने शूटर को पकड़ने के लिए शुक्रवार की रात जाल भी बिछाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि संभावित स्थानों पर पुलिस पकड़े गए बदमाश की निशानदेही पर दबिश पर दबिश देती रही। दूसरी ओर एसटीएफ व कोतवाली पुलिस ने जेल में खूंखार बंदियों के साथ ही 10 दिन के भीतर उनसे मिलने वाले लोगों का ब्यौरा खंगालती रही। ताकि घटना की असलियत तक पहुंच सके। पुलिस अधीक्षक एस आनंद लगातार पकड़े गए बदमाश से पूछताछ कर रहे हैं। एसपी ने बताया कि अभी कुछ संदिग्ध लोग पकड़े गए हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। संभावना है कि जल्द ही हत्या का खुलासा होगा।
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800 से अधिक निरुद्ध हैं बंदी
जिला कारागार में क्षमता से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। कारागार में बंदियों को रखने की क्षमता 456 है। मौजूदा समय में जेल में 826 बंदी निरुद्ध हैं। उनकी सुरक्षा के लिए मानक से कम बंदीरक्षक तैनात हैं। केवल 27 बंदीरक्षकों से काम चलाया जा रहा है। गैर जनपद स्थानांतरित बंदीरक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। प्रभारी जेल अधीक्षक आरपी चौधरी ने बताया कि गैर जनपद से स्थानांतरित बंदीरक्षकों के न आने के कारण 6 बंदीरक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया गया।
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कई चक्र हो रही बैरकों की छानबीन
जिला कारागार में निरुद्ध शातिर बंदियों से लगातार पूछताछ चल रही है। इतना ही नहीं दिन व रात में कई बार बैरकों की सघन तलाशी ली जा रही है। शातिर बंदियों से पुलिस के अलावा खुद जेलर व डिप्टी जेलर भी पूछताछ कर रहे हैं। ताकि घटना को लेकर हकीकत का पता लग सके। शनिवार को भी कार्यालयों में बुलाकर शातिर बंदियों से अफसर पूछताछ करते रहे। बैरक नंबर आठ में निरुद्ध सभी बंदियों से अलग-अलग पूछताछ की गई। ताकि पहले हुए विवाद की जानकारी हो सके।

जेल की काली कमाई भी बन सकती है प्रधान बंदीरक्षक के हत्या की वजह
मुलाकात से लेकर बंदियों को सुविधाएं मुहैया कराने का फिक्स है रेट
काली कमाई के बटवारे को भी लेकर मची रहती थी खींचतान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिला कारागार में अवैध कमाई भी प्रधान बंदीरक्षक की हत्या की वजह हो सकती है। इस दिशा में पुलिस व एसटीएफ की छानबीन तेज हो गई है। बंदियों से मुलाकात से लेकर उन्हें जेल के भीतर सुविधाएं मुहैया कराने के रेट भी फिक्स हैं। जिसे लेकर बंदीरक्षकों के बीच अक्सर खींचतान की बातें सामने आती रहती थीं। विरोध करने वाले बंदियों पर जुल्म भी ढाया जाता रहा है।
जिला कारागार में तैनात प्रधान बंदी रक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की बुधवार की शाम जेल रोड क्रासिंग पर बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद बदमाश भाग निकले थे। प्रधान बंदी रक्षक की हत्या के बाद पुलिस विभाग में सनसनी फैल गई। आईजी जोन, डीआईजी जेल से लेकर एसटीएफ के एसपी भी जेल पहुंच गए। परिवार के लोगों से बातचीत के बाद घटना के सिलसिले में जानकारी की। सूत्रों की मानें तो जिला कारागार में 8 सौ से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। जेल में निरुद्ध बंदियों को रुपये लेकर सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। यहां तक कि बंदियों से मिलने के लिए पहुंचने वाले मुलाकातियों से भी भीतर तक पहुंचने के लिए 50 से 70 रुपये तक ले लिए जाते हैं। जिसके बाद वे अपनों से मुलाकात कर पाते हैं। हर माह लाखों रुपये की आमदनी के चलते मेन गेट व भीतर के गेट पर ड्यूटी के लिए बंदीरक्षकों के बीच घमासान मचा रहता था। प्रधान बंदी रक्षक हरिनारायण त्रिवेदी कई सालों से गेट से लेकर बैरकों की ड्यूटी लगाया करते थे। वह खुद अधिकांश ड्यूटी करते थे। हत्या की छानबीन में जुटी पुलिस व एसटीएफ भी आशंका जता रही है हो सकता है जेल की अवैध कमाई को लेकर प्रधान बंदी रक्षक की हत्या कराई गई हो।
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बेटे ने जताया है बंदीरक्षक पर संदेह
जेल के प्रधान बंदी रक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की हत्या के बाद उसके बेटे अरविंद ने बंदीरक्षक संत कुमार मिश्र के ऊपर हत्या कराने की आशंका जताते हुए पुलिस को तहरीर दी है। कोतवाली पुलिस डिप्टी जेलर अवधेश राय की तहरीर पर दर्ज अज्ञात मुकदमे में उस तहरीर को शामिल कर जांच आगे शुरू कर दी है। बंदीरक्षक से पुलिस अधीक्षक के साथ ही एसटीएफ व डीआईजी जेल भी पूछताछ कर चुके हैं।
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