मेरठ से चलकर बेल्हा पहुंचे मानधाता के लोग।
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लॉकडाउन के बीच बढ़ती दुश्वारियों से परेशान होकर बाहर से लोगों के आने का सिलसिला जारी है। मेरठ में काम करने वाले तीन युवक काम-धंधा बंद होने के बाद पैदल ही प्रतापगढ़ के लिए चल दिए। दिनभर पैदल चलते। मंदिरों में रात बिताई। छह दिन में तीनों मेरठ से पैदल ही घर पहुंचे। सभी को स्थानीय स्कूलों में क्वारंटीन कराया जाएगा।
मानधाता बाजार के रहने वाले रामबख्श, शिवलाल व दूधनाथ मेरठ शहर में कई वर्षों से काम करते थे। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन के बाद उनके भी काम-धंधे बंद हो गए। कुछ दिनों तक तो काम चलता रहा, लेकिन समय के साथ ही भोजन की समस्या आड़े आने लगी।
नौबत भूखों मरने तक पहुंचने को हुई तो सभी 9 अप्रैल को अपने घर के लिए पैदल ही चल पड़े। परिवार के लोग भी सभी को घर बुलाने की जिद पर अड़े थे। तीनों अपनी जान जोखिम में डालते हुए घर के लिए निकल पड़े।
उन्होंने बताया कि रास्ते में पुलिसवालों ने उनकी बहुत मदद की। उनके पास पैसे भी नहीं थे। पुलिसकर्मियों के अलावा बाजार के लोग भी उन्हें खाना व पानी उपलब्ध कराते रहे। रात होने पर कहीं मंदिर देखकर रुक जाते थे।
बुधवार को किसी तरह पैदल ही सफर तय करते हुए सुलतानपुर पहुंचे। वहां भी उनका चिकित्सीय परीक्षण हुआ। शहर पहुंचने पर सभी ने खुद जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच कराई। इसके बाद घरों को रवाना हो गए। घर पहुंचने पर सभी को प्राइमरी स्कूल में क्वारंटीन कराने की तैयारी शुरू हो गई।
उजाला होते ही घर की ओर बढ़ते थे कदम
मेरठ से घर आने के लिए रात में बाजार व मंदिरों में आराम करने के लिए भले ही रामबख्श, शिवलाल व दूधनाथ के कदम रुकते थे, लेकिन सुबह उजाला होते ही सभी घर के लिए निकल पड़ते थे। रास्ते में खाने-पीने को मिल गया तो ठीक है नहीं तो पैदल घर तक पहुंचने का जज्बा लेकर सभी चलते रहे। उनके कदम घर पहुंचने के बाद ही थमे।