कोरोना से जंग लड़ने वाले दिहाड़ी मजदूरों के खाते में एक-एक हजार रुपये आने वाले हैं। श्रम विभाग में पंजीकरण कराने वाले 34,895 मजदूरों से आधारकार्ड और बैंक पासबुक की छाया प्रति मांगी गई है। इन मजदूरों को कोटेदारों के माध्यम से 20 किग्रा गेहूं और 15 किग्रा चावल मुफ्त में दिया जाएगा। शासन की इस पहल से दिहाड़ी मजदूरों को काफी राहत मिली है।
जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण को समाप्त करने के लिए लॉक डाउन से पहले उन दिहाड़ी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। दिहाड़ी मजदूरों को भूख की विभीषिका न झेलना पडे़, इसके लिए श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। जिले के श्रम विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 34,895 मजदूर पंजीकृत हैं। मगर उनमें से 2153 मजदूर ऐसेे हैं, जिनका आधार नंबर और बैंक खाते का नंबर अपडेट है।
बड़ी संख्या में मजदूरों के योजना से बाहर होने के कारण विभागीय अधिकारियों ने अब पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों से बैंख खाते की पासबुक और आधारकार्ड मांगा है। आनलाइन फीडिंग होने के बाद इन मजदूरों को भी योजना का लाभ मिलेगा।
इधर, जिला आपूर्ति विभाग ने 15,456 ऐेसे मजदूरों का चयन किया है, जिन्हें कोटेदारों के माध्यम से 20 किग्रा गेहूं और 15 किग्रा चावल नि:शुल्क दिया जाएगा। जिला पूर्ति विभाग ने इन लाभार्थियों की संख्या श्रम विभाग से ही निकाली है।
दरअसल, श्रम विभाग में पंजीकृत 34,895 मजदूरों में 15,456 ऐसेे लाभार्थी हैं, जिनका राशनकार्ड नहीं बना है, जबकि 19,439 पंजीकृत मजदूरों का राशनकार्ड बना हुआ है। जो पहले से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली से प्रतिमाह राशन प्राप्त कर रहे हैं।
कोटेदारों को अवशेष राशन बांटने की मिली छूट
जिले के कोटेदारों के पास पड़े अवशेष राशन श्रमिकों को बांटने के लिए आपूर्ति विभाग ने पत्र जारी कर दिया है। फिलहाल राशन का उठान करने वाले कोटेदारों को अतिरिक्त राशन दिया जा रहा है।
घर बैठे खाता नंबर की कर सकते हैं फीडिंग
श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाले मजदूर घर बैठे खाता नंबर और आधार की फीडिंग कर सकते हैं। उनके पास जो पंजीकरण प्रमाणपत्र है, उसे मोबाइल पर खोल करके वह फीड कर सकते हैं। अपडेट होते ही योजना में शामिल हो जाएंगे।
श्रम विभाग में पंजीकृत उन मजदूरों से आधार नंबर और बैंक पासबुक की छायाप्रति आते ही फीडिंग कराकर उन्हें लाभ दिलाया जाएगा। राशन की व्यवस्था हो गई है, जो लाभार्थियों को एक तारीख के बाद मिलना प्रारंभ हो जाएगा।
डा. महेंद्र प्रताप सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी