मुजफ्फरनगर में मदरसों को तत्काल बंद करने का नोटिस देने से कांग्रेसियों में नाराजगी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एडीएम को दिया। जिसमें इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।
अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्ष दानिश माबूद ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि मुजफ्फरनगर में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने नियम विपरीत मदरसों को नोटिस भेजा है। मदरसों को तत्काल बंद न करने पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने की बात कही गई है। जबकि सन 1995 में मदरसों को स्कूलों के नियमों और विनियमों से अलग कर दिया गया था।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि मदरसे आम स्कूलों की तरह नहीं हैं, इनका संचालन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत होता है। स्कूलों की तरह जुर्माना प्रक्रिया मदरसों पर लागू नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 25000 मदरसे हैं, जिनमें 16500 से अधिक मदरसे मदरसा एजुकेशन बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं। हम कांग्रेसजन सरकार से मांग करते हैं की मानक के अनुसार बचे हुए मदरसों को मान्यता दी जाए। इस दौरान मोहम्मद आफाक, शाहिद अली, सुहैल अंसारी, मोहम्मद इश्तियाक संजय, वेदांत तिवारी, फरीद अहमद, अजमत हुसैन, यमुना प्रसाद, इरफान खान, डॉ बशीर अहमद, मोहम्मद आरिफ और करुणा शंकर आदि लोग मौजूद रहे।