समाजवादी कुनबे में शीर्ष स्तर पर टकराव से जिले के सपाई पशोपेश में है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वो किधर जाएं। रविवार को पहले सीएम अखिलेश यादव द्वारा चाचा शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और फिर शाम को रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्कासित करने की सूचना के बाद जिले के सपाइयों में हड़कंप की स्थिति रही। छोटे से लेकर बड़े नेता तक कुछ बोलने से कतराते रहे। बस इतना कहा कि सब ठीक हो जाएगा।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के परिवार में मची कलह सामने आने के बाद जिले के सपाई भी कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं। हालांकि अंदरूनी तौर पर यहां भी नेता दो गुटों में बंटे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर सामने आने के लिए तैयार नहीं है। सोमवार को लखनऊ में सपा सुप्रीमो द्वारा बुलाई गई बैठक में यहां के भी कुछ नेताओं को बुलाया गया है। रामगोपाल यादव के पार्टी से निष्कासन व शिवपाल यादव की मंत्रिमंडल से छुट्टी के बाद सपाई हैरान हैं। हालांकि वे उम्मीद जता रहे हैं कि सोमवार को बुलाई गई सपा मुखिया की मीटिंग में मामले का पटाक्षेप हो सकता है।
जिलाध्यक्ष हो या महासचिव, सातों विधानसभा अध्यक्ष के अलावा अन्य पदाधिकारी भी संगठन के साथ ही सरकार में चल रही उठापटक से पशोपेश में हैं। 24 अक्तूबर को लखनऊ में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जनपद के सभी विधायक, पूर्व विधायक, सांसद व पूर्व सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, सभासदों को तलब किया है। मुख्यमंत्री अखिलेश रविवार को विधायक व मंत्रियों के साथ बैठक कर चुके हैं। कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा से लेकर सपा के सदर विधायक नागेंद्र सिंह यादव मुन्ना, पट्टी विधायक रामसिंह इस मामले में कुछ भी बोलना बेहतर नहीं समझते। सपा जिलाध्यक्ष भैयाराम पटेल व जिला महासचिव को भी भरोसा है कि 24 को बैठक में सबकुछ ठीक हो जाएगा। बयान कुछ भी हो लेकिन भीतर से कोई सीएम के पक्ष में है तो कोई संगठन के साथ खड़ा नजर आ रहा है।