कॉलेजों की ओर से आंतरिक परीक्षाओं में गड़बड़ी किए जाने की जांच विश्वविद्यालय की ओर से शुरु कर दी गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कॉलेजों ने सभी छात्र-छात्राओं को आंतरिक परीक्षा में 90 फीसदी से अधिक अंक दिए हैं। यही स्थिति प्रायोगिक परीक्षा की भी रही। हालांकि विश्वविद्यालय की ओर से जांच शुरु किए जाने पर कॉलेजों के हाथ पांव फूल गए। विश्वविद्यालय ने 90 फीसदी से अधिक पाने वाले छात्र-छात्राओं की उत्तरपुस्तिकाएं मंगा ली है।
प्रो.राजेंद्र सिंह(रज्जू भैया) विश्वविद्यालय की ओर से विषम सेमेस्टर से पहले कॉलेजों को आंतरिक परीक्षा कराने का निर्देश दिया था। विवि के आदेश के बावजूद कॉलेजों ने समय से आंतरिक परीक्षा नहीं कराई। फरवरी में विषम सेमेस्टर की परीक्षा कराई गई। उसके बाद कॉलेजों को दोबारा मौका देते हुए आंतरिक परीक्षा कराने का निर्देश दिया।
कॉलेजों ने मनमाने ढंग से परीक्षा संपन्न कराकर सभी छात्र-छात्राओं को 90 फीसदी से अधिक अंक दे दिया। कॉलेज लागिन पर छात्र-छात्राओं को प्राप्त अंकों को भी अपलोड कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने अधिकतर छात्र-छात्राओं को 90 फीसदी से अधिक अंक मिलने जांच शुरू कर दी। विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों को 90 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं की उत्तरपुस्तिका मंगा ली।
यही हाल प्रायोगिक परीक्षा का भी रहा। अधिकांश छात्र-छात्राओं को 85 फीसदी से अधिक अंक दे दिए गए। विश्वविद्यालय ने 81 से 85 प्रतिशत अंक पाने वालों की उत्तरपुस्तिकाओं को भी मंगा लिया है। विश्वविद्यालय ने उत्तरपुस्तिकाओं की जांच शुरु कर दी है। विश्वविद्यालय के कार्रवाई कालेजों में हड़कंप मचा है। जांच में फंसने का डर कॉलेजों को सता रहा है।
आंतरिक परीक्षा में 90 फीसदी और प्रायोगिक परीक्षा में 81 से 85 फीसदी अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं की उत्तरपुस्तिकाएं मंगाई गई है। उत्तरपुस्तिकाओं की जांच भी की जा रही है। डॉ.अखिलेश सिंह, कुलपति, राज्य विवि।