बुधवार को मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यक्रम को लेकर जिले के अधिवक्ता दो फाड़ में बंट गए हैं। जिला बार एसोसिएशन, वकील परिषद और जूबाए का एक गुट न्यायिक अधिकारियों के पक्ष में है जबकि दूसरा गुट का विरोध जारी है। मंगलवार को हड़ताल पर रहने वाले अधिवक्ताओं ने बुधवार को सीजे के आगमन पर विरोध प्रदर्शन करने की बात कही है।
सोमवार को जिला जज उमेशचंद्र श्रीवास्तव के बुलावे पर हुई बैठक में सभी गुटों के अधिवक्ताओं ने 24 और 25 मार्च को हड़ताल स्थगित रखने की सहमति जताई थी। मगर बाहर निकलने के बाद जूबाए के दूसरे गुट में आम राय नहीं बनने के कारण हड़ताल जारी रखने का फैसला ले लिया। मंगलवार को जूबाए अध्यक्ष कमलेश चंद्र पांडेय के नेतृत्व में उपाध्यक्ष विनय कुमार मिश्र, गिरीश कुमार मिश्र, राजेंद्र कुमार पाठक सहित कई अधिवक्ताओं ने दीवानी परिसर में नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन भी किया।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने और मुख्य न्यायमूर्ति के आगमन पर विरोध प्रदर्शन करने के फैसले से अवगत करा दिया है। इन अधिवक्ताओं का कहना है कि 16 अगस्त 2011 को अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज और आउट लाइन कोर्ट स्थापित करने से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अधिवक्ताओं की मांग के बाद भी कोई फैसला नहीं हुआ है। इधर, जूबाए (दूसरे गुट) के अध्यक्ष भूपेंद्रनाथ शुक्ला और महामंत्री दिनेश कुमार पांडेय ने अधिवक्ताओं से हड़ताल स्थगित कर सीजे के कार्यक्रम में प्रतिभाग करने की अपील की है।