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नहाय खाय से शुरु हुआ छठ महापर्व

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पंजाबी मार्केट में छठ पूजा की तैयारी में बांस की डलिया खरीदती महिला। - फोटो : PRATAPGARH
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भगवान सूर्य की अराधना का महापर्व छठ व्रत गुरुवार को नहाय खाय से शुरु हो गया। घर में साफ सफाई के साथ मिट्टी के चूल्हे बनाए गए। यह पर्व 3 नवंबर को सुबह सूर्य को अध्र्य देने के बाद समाप्त होगा। ऐसे में छठ व्रत करने वालों के घर के लोगों की आस्था देखते ही बन रही है।
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चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरूआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से नहाय खाय से शुरु हुआ। व्रती महिलाओं और पुरूषों के साथ घर के सदस्यों ने घर की सफाई की। इसके बाद छठ व्रती स्नात कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन को ग्रहण किया। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया।
मान्यता है कि इस दिन भोजन के रूप में कद्दू-दाल, लौकी व चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है। वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले पकवान बनाने के लिए व्रतियों ने घर के सदस्यों व महिलाओं के साथ छठ माता के गीत गुनगुनाते हुए मिट्टी के चूल्हे बनाए। वहीं कार्तिक शुक्ल की पंचमी 1 नवंबर को व्रत करने वाले दिनभर का उपवास रखने के शाम को भोजन ग्रहण करेंगे।
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जिसे खरना के नाम से जाना जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित किया जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता। घर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
संध्या अर्घ्य 2 नवंबर को
व्रत रखने वाले कार्तिक शुक्ल की षष्ठी 2 नवंबर को घर पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। इस दिन घरों में प्रसाद के लिए ठेकुआ, चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। बांस के दौरे में अर्घ्य का सूप सजाकर घाट पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
ऊषा अर्घ्य 3 नवंबर को
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल की सप्तमी की सुबह 3 नवंबर को व्रत करने वाले घाट पर जाकर उगते हुए सूर्य को अध्र्य देंगे। इसके बाद व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर व प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करेंगे।
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