एक दूसरे के परंपरागत वोट को खिसकाने में जुटे सियासी दलों के उम्मीदवार
मतदान करीब देख तेज हुआ चुनाव प्रचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रानीगंज। नगर पंचायत के मतदान का जैसे-जैसे करीब आ रहा है। वैसे-वैसे सियासी दलों के उम्मीदवार विरोधी दलों के परंपरागत मतों में सेंधमारी करने लगे हैं। कोई अपना गढ़ बचाने में नाराज और उपेक्षित मतदाताओं का विश्वास हासिल करने के लिए भागदौड़ कर रहा है तो कोई उनके परंपरागत मतों में सेंधमारी करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
रानीगंज तहसील के रानीगंज नगर पंचायत में दूसरी बार निकाय चुनाव होने जा रहा है। वहीं पृथ्वीगंज और सुवंसा में पहली बार नगर की सरकार चुनी जाएगी। तीनों नगर पंचायतों में रानीगंज की सीट काफी अहम मानी जा रही है। क्योंकि नगर पंचायत के गठन के बाद हुए चुनाव में यह सीट भाजपा की झोली में गई थी।
इस बार के चुनाव में भाजपा नेताओं को अपने गढ़ बचाते हुए अन्य दो नगर पंचायतों में कमल खिलाने की कोशिश है। वहीं सपा और बसपा को भी नगर पंचायत का चुनाव जीतने से आने वाले लोकसभा के चुनाव में संजीवनी बूटी मिलेगी। कांग्रेस के साथ ही आम आदमी पार्टी को भी नगर पंचायत से खाता खोलने की दरकार है।
इस चुनाव में भी जातीय समीकरण साधने के साथ ही एक दूसरे के परंपरागत वोटों में सेंधमारी की जा रही है। प्रमुख दलों के कार्यकर्ता और समर्थक रात दिन एक दूसरे का वोट खिसकाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है।
वहीं प्रमुख दलों के माननीय भी अपनी साख और प्रतिष्ठा बचाने के लिए प्रत्याशियों के समर्थन में जनता के बीच जाकर समर्थन मांग रहे है। मतदाता प्रत्याशियों की परिक्रमा से मुंह खोलने से कतरा रहा है सभी को जीत का आशीर्वाद देकर उन्हें नाराज नहीं कर रहा है।
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चर्चित चेहरों को आपने पाले में लाने की कोशिश हुई तेज
निकाय चुनाव को लेकर उम्मीदवार जनता से समर्थन पाने के लिए जी जान से जुटे हुए है। वहीं प्रचार में ज्यादा से ज्यादा वोट पाने के लिए प्रमुख दलों के उम्मीदवार चर्चित चेहरों को भी आपने पाले में लाकर माहौल अपने पक्ष में बनाने की कोशिश है। हालांकि चर्चित चेहरे इस कोशिश में प्रत्याशियों को समर्थन का भरोसा दिलाकर चुनाव में साथ निकलने से परहेज कर रहे है।
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जीत का मंत्र बताने वालों का भी लिया जा रहा है सहारा
रानीगंज। नगर पंचायत के चुनाव में प्रत्याशी चकरघिन्नी बन गया है। चुनाव जीतने के लिए हर कोई नया हथकंडा अपनाने में पीछे नहीं होना चाह रहा है। प्रचार में निकले प्रत्याशियों को चौराहे और तिराहे पर बैठे लोगों के पास पहुंचने पर उन्हें अपने अपने तरीके से कुछ लोग जीत का मंत्र बता रहे हैं। वहीं उनकी सलाह प्रत्याशियों के लिए और भी मुसीबत बन जाती है। अगले दिन सलाह को अमल में न लाने पर चुनाव में नुकसान होने की बात कही जाती है।