त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ब्लॉकों और जिला मुख्यालय पर काउंटर लगाकर नोड्यूज के लिए पांच-पांच सौ रुपये की वसूली करने वाले जिला पंचायत के कर्मचारियों ने लाखों रुपये का गोलमाल किया है। ऑफलाइन रसीद काटने वाले कर्मचारियों ने रसीद बुक ही गायब कर दी है। पंचायत चुनाव के दो माह बीतने के बाद भी कर्मचारी यह नहीं बता रहे हैं कि कितने प्रत्याशियों को नोड्यूज दिया गया और कितने रुपये की वसूली हुई।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद के 1193, बीडीसी सदस्य के 1434 और जिला पंचायत सदस्यों की 57 सीटों के लिए लगभग 15,852 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया था। इसमें से कुछ प्रत्याशियों ने दो या तीन सेटों में नामांकन पत्र दाखिल किया था। ग्राम पंचायत सदस्य पद के 14,917 पदों के लिए 18,456 लोगों ने पर्चा भरा था। पंच स्थानीय कार्यालय के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के 17 ब्लाकों में 15,852 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।
इन प्रत्याशियों से नोड्यूज के लिए पांच-पांच सौ रुपये वसूले गए। इस प्रकार 79,26,000 रुपये की आमदनी होने चाहिए। ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले कुछ प्रत्याशियों ने जिला पंचायत का नोड्यूज ले लिया था, मगर बाद में चुनाव आयोग के स्पष्ट करने पर सदस्य पद के अधिकांश प्रत्याशियों ने नोड्यूज नहीं लिया।
जिले में 19 अप्रैल को पंचायत चुनाव हुआ था, मगर दो माह बाद भी रसीद काटने वाले कर्मचारियों ने धनराशि नहीं जमा की है। कुछ कर्मचारी रसीद गायब होने का बहाना करके रुपये हजम करने की फिराक में हैं। यही वजह है कि दो माह बाद भी नोड्यूज से हुई कमाई की असली तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। अधिकारी भी यह बताने में नाकाम साबित हो रहे हैं कि कितने लोगों को नोड्यूज दिया गया और कितनी धनराशि मिली है।
साहब छुट्टी पर मौज कर रहे कर्मचारी
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सप्ताह भर से अवकाश पर हैं। उनके नहीं होने से कर्मचारी मौज कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को कार्यालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालय में गिने-चुने कर्मचारी ही मौजूद रहे। सुबह आने वाले कर्मचारी दस्तखत बनाकर गायब हो जाते हैं।
आफिस में क्या हो रहा है, मुझे कुछ भी जानकारी नहीं है। एएमए सप्ताह भर से अवकाश पर हैं। उन्होंने सिर्फ मुझे चार्ज दिया है। रसीद गायब होने की मुझे जानकारी नहीं है। मगर अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि नोड्यूज से कितनी आमदनी हुई है।
हेमलता दोहरे, जिला अभियंता और प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी