किसानों का धान खरीदने में खाद्य विभाग फिसड्डी साबित हो रहा है। ढाई महीने की खरीद में अभी तक मात्र 39.9 प्रतिशत ही धान खरीदने में सफलता मिली है। हालांकि अफसर अभी धान खरीद के लिए पर्याप्त समय होने की बात कहकर लक्ष्य हासिल करने का दावा कर रहे हैं।
किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 57 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। जिले को 59,900 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य मिला हुआ था, मगर अभी तक 23,899 मीट्रिक टन ही धान की खरीद हुई है। जो लक्ष्य का 39.9 प्रतिशत है। धान खरीद के लिए एक नवंबर से 28 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया है।
मगर वास्तविकता तो यह है कि जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, उनमें से अधिकांश लोगों ने अपना धान बेच दिया है। मगर इसके बाद भी खाद्य विभाग के अफसरों का दावा है कि फरवरी माह तक धान खरीद बढ़ सकती है। सवाल यह उठता है कि जब अक्तूबर माह में किसानों के धान की फसल कट गई, तो वह तीन माह बाद क्यों धान बेचेगा। अधिकांश किसान धान बेचकर गेहूं के बुवाई की तैयारी करते हैं। इससे स्पष्ट है कि अधिकांश किसान जिन्हें धान बेचना था, वह बेच चुके हैं।
क्रय केंद्रों पर पसरा है सन्नाटा
जिले के धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है। कर्मचारी सुबह से शाम तक किसानों के आने की प्रतीक्षा करते हैं, मगर कोई दिखाई पड़ता। इससे धान खरीद केंद्र खुल तो रहे हैं, मगर धान बेचने वाला कोई नहीं आता है।
वेबसाइट एक होने पर खुली पोल
राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की वेबसाइट एक में ही जोड़ दी गई है। इससे जो किसान धान बेचने जाता है, उनका नाम डालते ही पता चल जाता है, उसके पास कितनी जमीन है। ऐसे में वह जमीन के अनुपात में ही धान की बिक्री कर पाता है। अधिक बेचकर लाभ कमाने की तैयारी फेल होती जाती है।
धान की अपेक्षित खरीद नहीं हो पाई है। केंद्र प्रभारियों से अविलंब लक्ष्य हासिल करने को कहा गया है। धान खरीदने के लिए फरवरी तक का समय है, उम्मीद है कि लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे। धनंजय प्रताप सिंह, जिला विपणन अधिकारी
बाबा बेलखरनाथ ब्लाक के खूझीकला सहकारी समिति में खुले धान क्रय केन्द्र पर पसरा सन्नाटा।- फोटो : PRATAPGARH