जिले के किसानों को कर्ज माफी से राहत देने के लिए सभी बैंकों से 30 अप्रैल तक संख्या और बकाया रकम की जानकारी मांगी गई है। बकाएदारों की सूची तैयार करने में कोई चूक न हो जाए, इसके लिए रात-दिन काम हो रहा है। आरबीआई से तैयार प्रारुप में किसानों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। एक तो वह जिन्होंने अभी तक एक भी किश्त नहीं जमा की है, दूसरे वह जो एक लाख तक ऋण लिए हैं और तीसरे उन किसानों की सूची मांगी गई है, जिन्होंने बैंक से एक लाख रुपये से अधिक का ऋण लिया है।
योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्जमाफी का फैसला लेने के बाद अब बैंकों से वास्तविक स्थिति का डाटा मांगा गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैकों को पत्र जारी कर ऋण लेने वाले किसानों की संख्या और धनराशि का विवरण मांगा है। प्रारुप में ऋण लेने वाले किसानों की तीन श्रणियां बांटी गई हैं। पहली श्रेणी में उन किसानों की सूची मांगी गई हैं, जिन्होंने बैंकों से ऋण लेने के बाद मार्च 2016 तक एक भी किस्त नहीं जमा की है, दूसरे वह जो एक लाख तक ऋण लिए हैं, और तीसरी श्रेणी में उन किसानों की सूची मांगी गई है, जिन्होंने बैंक से एक लाख रुपये से अधिक का ऋण लिया है।
बैंक अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2008 के बाद ऋण लेने वाले अधिकांश किसानों ने एक भी किस्त नहीं जमा की है। किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण लेने वालों ने ही अपनी साख बनाए रखने के लिए आधी-अधूरी किस्त जमा की है। फिलहाल बैंक कर्मचारी इन दिनों रात-दिन जुटकर ऋण लेने वाले किसानों का ब्यौरा जुटाने में लगे हुए हैं। एलडीएम एएन सिंह ने बताया कि बकाएदारों का डाटा आरबीआई भेजा जा रहा है, प्रयास यह किया जा रहा है कि आंकड़ा भेजने में कोई चूक न होने पाए। शासन को आंकड़ा मिलने के बाद ही कर्जमाफी के वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।