आंवला कारोबार से जुड़े छोटे उद्यमियों को राहत देने के लिए शहर के गोड़े गांव में सवा करोड़ की लागत से दो साल पहले आंवला प्रोसेसिंग प्लांट बनाया गया। लेकिन, अब प्लांट को कर्मचारियों की दरकार है। कर्मचारियों की नियुक्ति न होने से प्लांट शुरू नहीं हो सका है।
जिले के करीब पांच हजार छोटे कारोबारियों को बड़े उद्यमियों के प्रतिष्ठानों में आंवला उत्पाद की प्रोसेसिंग करानी पड़ती है। कई छोटे उद्यमी आंवला प्रोसेसिंग का कार्य प्रयागराज व सुल्तानपुर में भी कराते हैं। एक क्विंटल आंवले से बने अलग-अलग उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए पांच से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
छोटे आंवला कारोबारियों को राहत देने के लिए वर्ष 2024 में प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना कराई गई है ताकि उद्यमियों को दूसरे जनपदों की दौड़ न लगानी पड़े। बताया गया कि प्लांट में महज 500 से एक हजार रुपये में उद्यमी आंवला प्रोसेसिंग करा सकेंगे। लेकिन, संचालन नहीं होने से उद्यमियों को नुकसान हो रहा है।
व्यापारियों ने बताया कि प्रोसेसिंग प्लांट की निगरानी की जिम्मेदारी कृषि उत्पाद संगठन (एफपीओ) को दी जाएगी। संगठन राजस्व संग्रह करके कृषि विभाग को देगा। प्लांट से होने वाली आमदनी का लेखा-जेखा भी कृषि विभाग के पास होगा।
इनसेट-
इस तरह की मशीनों की है उपलब्धता
प्रोसेसिंग प्लांट में आंवला काटने, सुखाने, पल्पिंग करने, कैंडी बनाने की मशीनें लगाई गई हैं। उत्पाद तैयार होने के बाद पैकेजिंग की सुविधा भी प्लांट में उपलब्ध कराई गई है। देश ही नहीं विदेश तक यहां के आंवले का कारोबार फैला है। आंवला प्रोसेसिंग प्लांट में प्रतिदिन करीब एक टन आंवले की प्रोसेसिंग कराने की क्षमता है।
बोले कारोबारी
0 प्लांट शुरू होने से आंवला कारोबार को रफ्तार मिलेगी। प्लांट न शुरू होने से छोटे कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। - अर्पित खंडेलवाल, जिला मंत्री, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल।
0 छोटे उद्यमी कम लागत में प्लांट से उत्पाद तैयार कर पैकेजिंग कर सकेंगे, लेकिन समय पर लाभ न मिलने से आंवला कारोबार पीछे हो रहा है। - मंजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष, जिला व्यापार मंडल।
वर्जन
एपीएफओ गठन की प्रक्रिया चल रही है। उद्यमियों ने प्रस्ताव भेजा है। कमेटी बनाकर समिति के गठन का कार्य जल्द पूरा कर प्लांट का संचालन किया जाएगा। - विनोद यादव, उप कृषि निदेशक।