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बारिश बाद अब किसानों पर आंकड़ों का कहर

Tue, 17 Mar 2015 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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प्रकृति की मार से बेहाल बेल्हा के किसानों को मिलने वाली राहत के सांचे में प्रशासनिक आंकड़े फिट नहीं दिख रहे। एक से चार मार्च और 15 से 16 मार्च तक हुई बारिश से नुकसान का जो रुझान तहसीलों से मिल रहे हैं वह किसानों के हित में नहीं दिख रहे। सरकार का मानक है कि प्रकृति आपदा में सहायता के लिए कम से कम 50 प्रतिशत या इससे ऊपर का नुकसान होना चाहिए। इससे कम फसलाें के नुकसान पर शासन किसानों को कोई राहत नहीं देगा। एक से चार मार्च तक हुई बारिश का जो रिकार्ड प्रशासन ने शासन को भेजा है उसमें सदर में 47, पट्टी में 36, कुंडा में 43 और लालगंज में 9 तथा रानीगंज तहसील में 15 मिलीमीटर दर्ज है।
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बारिश और हवा से फसलों के हुए नुकसान का भेजा गया अनुमानित डाटा 30 प्रतिशत से भी कम का है। मतलब स्पष्ट है कि इन आंकड़ों के बूते प्रशासन सरकार से जिले के किसानों को कोई लाभ नहीं दिला सकेगा। बतादें कि 15 मार्च को भी हुई बारिश का प्रशासनिक आंकड़ा मौसम के प्रहार से कराहते किसानों को राहत देता नहीं दिख रहा। इस दिन हुई बारिश का जो रिकार्ड अफसरों ने सरकार को भेजा उसमें कुंडा, लालगंज व रानीगंज तहसीलों में सिर्फ एक-एक मिलीमीटर बारिश दिखाई गई है। सदर और पट्टी तहसील में बारिश का निल बताई गई है। 16 मार्च को सदर और पट्टी में 13-13, कुंडा में 36 और लालगंज में तीन तथा रानीगंज तहसील में 15 मिलीमीटर बारिश शासन को अधिकारियों ने बताया है। किसी भी तहसील से राहत प्रबंधन कार्यालय नुकसान का सर्वेक्षित डाटा शाम पांच बजे तक नहीं पहुंच कसा। कार्यालय को तहसीलों से प्राप्त रुझान के मुताबिक हर जगह करीब 25 से 30 प्रतिशत ही फसलों का नुकसान बताया जा रहा है।
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