वृहद पौधरोपण अभियान के तहत जिले में 29 लाख पौधे रोपे जाने का दावा किया गया है, लेकिन चार माह के बाद भी इनकी जियाे टैगिंग नहीं हुई। मौजूदा समय में कई पौधे या तो सूख गए हैं या फिर जानवर खा चुके हैं। जिले में वन विभाग के अलावा ग्राम्य विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत विभाग, समाज कल्याण, पशु पालन, राजस्व विभाग सहित 24 अन्य विभागों ने वृहद पौधरोपण अभियान के तहत रोपे गए।
पौधरोपण के तत्काल बाद इनकी ऑनलाइन जियो टैगिंग होनी थी। जुलाई में आरंभ अभियान को बीते चार माह हुए, लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने इनकी जियो टैगिंग नहीं की है। ऐसा न होने से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किस विभाग ने कहां कितने पौधे रोपे।
वन विभाग ने सभी विभागों को रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग के लिए कहा है। प्रभागीय निदेशक जगदंबिका प्रसाद के मुताबिक 29 लाख पौधे रोपे गए हैं। पौधरोपण के साथ ही जियो टैगिंग अनिवार्य है। संबंधित विभागों से रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग के लिए कहा गया है। मार्च 2024 तक शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
डीएम ने भी जियो टैगिंग के दिए निर्देश
डीएम संजीव रंजन ने एक सप्ताह पहले कैंप कार्यालय की बैठक में पौधरोपण और जिया टैगिंग की समीक्षा की थी। इसमें वन विभाग की ओर से जियो टैगिंग न होने पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए जल्द से जल्द जियो टैगिंग के लिए वन विभाग को निर्देश दिया था।
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पीजी कॉलेज पट्टी के प्राचार्य तथा भूगोलवेत्ता प्रो.अखिलेश पांडेय के मुताबिक जब अधिक संख्या में पौधे रोपे जाते हैं तो उन सभी पौधों की जियो टैगिंग की जाती है। कई महीनों बाद उनके विकास की रिपोर्ट जानने के लिए फिर से पौधे की फोटो खींचकर जियो टैगिंग के साथ भेजी जाती है। इससे पता चलता है कि यह वही पौधा है, जिसकी रोपते वक्त फोटो भेजी गई थी।