गौरतलब है कि मंदिर में कोरोना देवी की छवि को प्रतिमा के रूप में साकार किया गया था। इसके बाद यहां पूजा-पाठ शुरू हो गया था। मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं है, बल्कि कोविड-19 गाइडलाइन के पालन करने का संदेश दे रहा था।
एक ग्रामीण ने कहा था कि ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से इस विश्वास के साथ मंदिर की स्थापना की है कि देवता की पूजा करने से निश्चित रूप से लोगों को कोरोना वायरस से राहत मिलेगी।