किसानों को यूरिया मुहैया कराने में जिला प्रशासन एक बार फिर फेल हो गया है। जिले भर के किसान इन दिनों यूरिया खाद के लिए भटक रहे हैं। आलम यह है कि साधन सहकारी समितियों पर खाद पूरी तरह गायब है। मांग इतनी अधिक है, कि अफसरों की नींद उड़ गई है। जिला प्रशासन ने 2600 मीट्रिक टन यूूरिया की मांग की थी, मगर बीते सप्ताह आए रैक में सिर्फ 1318 मीट्रिक टन ही यूरिया होने पर अफसर मायूस हो गए।
खरीफ के सीजन में यूरिया की मांग अधिक होती है। इस बात की जानकारी अफसरों के होने के बावजूद खाद की कमी को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। खरीफ में साधन सहकारी समितियों को 19,000 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 9,000 मीट्रिक टन यूरिया मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था। मगर अभी तक साधन सहकारी समितियों पर 10,000 मीट्रिक टन और निजी दुकानों पर 7,000 मीट्रिक टन यूरिया पहुंची है। दरअसल जिले में इफ्को को यूरिया आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मगर साधन सहकारी समितियों पर मुहैया कराने में फेल हो गई है। जिला प्रशासन ने प्लांट से एक रैक (2600 मीट्रिकटन) यूरिया के लिए मांग पत्र भेजा था। मगर जिले को मात्र 1318 मीट्रिक टन ही यूरिया मिली। इससे जिले में खाद पहुंचते ही पल भर में खत्म हो गई। समितियों से खाद की मांग इतनी बढ़ गई है, कि अफसरों की नींद उड़ गई है। अफसरों की माने जो मांग से अधिक यूरिया की खपत कहां से आई, यह चिंता का विषय बना हुआ है। आलम यह है कि खुले बाजार में 45 किग्रा की बोरी 350 रुपये में बिक रही है।
समितियों पर यूरिया की हो रही कालाबाजारी
साधन सहकारी समितियों पर निर्धारित दाम से अधिक रुपये की वसूली हो रही है। बोरी पर 266 रुपये अंकित हैं, जबकि सचिव 290 रुपये वसूल रहे हैं। मंगरौरा के बरौली साधन सहकारी समिति पर छह अगस्त को किसानों ने हंगामा करना शुरू किया, तो सचिव ने 266 रुपये प्रति बोरी की दर से यूरिया दिया।
दुकानों पर महंगी होने के कारण समितियों पर दौड़ रहे हैं किसान
खाद बिक्री का लाइसेंस पाने वाली दुकानों में मनमाना दाम वसूला जा रहा है। इससे किसान साधन सहकारी समितियों से ही खाद खरीद रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर 266 रुपये की दर से यूरिया की बोरी मिल रही है, जबकि दुकानदार किसान की आवश्यकता के अनुरूप दाम घटा और बढ़ा रहे हैं।
खुले बाजार में बिक रही समितियों की खाद
साधन सहकारी समितियों पर इफ्को की खाद बिक रही है, जबकि इफ्को की खाद खुले बाजार में बिक्री के लिए अधिकृत नहीं है। इसके बावजूद खुले बाजार में इफ्को की खाद बिक रही है। इसका मतलब साफ है कि समितियों पर पहुंचने वाली खाद पीछे के रास्ते बाजार तक पहुंच रही है।
जिले में इस समय यूरिया का संकट गहराने का कारण मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होना है। 2600 मीट्रिकटन यूरिया की मांग की गई थी, मगर 1318 मीट्रिक टन यूरिया ही मिली है। ऐसेे में साधन सहकारी समितियों की मांग पूरा करना मुश्किल हो रहा है। फिलहाल जल्दी ही रैक आने वाली है।
अमित पांडेय, सहायक निबंधक, सहकारिता
खरीफ के सीजन में निजी क्षेत्र में 9,000 मीट्रिक टन खाद मुहैया कराने का लक्ष्य था, मगर अभी तक 7,000 मीट्रिक टन ही यूरिया मिली है। किसानों की मांग पूरी करने के लिए यूरिया के लिए मांगपत्र भेजा गया है। डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी