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पट्टी के रहने वाले हैं अखिलेश को रोकने वाले एडीएम वैभव मिश्र

Thu, 14 Feb 2019 12:16 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एयरपोर्ट पर रोकते एडीएम वैभव मिश्र - फोटो : प्रतापगढ़
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 बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित छात्रसंघ के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रयागराज प्रशासन की रिपोर्ट पर लखनऊ एयरपोर्ट पर रोककर अचानक से चर्चा में आए एडीएम वैभव मिश्र जिले के पट्टी इलाके के गजरिया गांव के रहने वाले हैं। इससे पहले भी मुजफ्फरनगर में एसडीएम रहते अतिक्रमण हटाने को लेकर भाजपा विधायक के पुत्र से उनकी भिड़ंत हो गई थी। जिसके बाद उनका ट्रांसफर हो गया। बांदा में भी एसडीएम के पद तैनाती के दौरान अवैध खनन करने वालों पर उन्होंने शिकंजा कसा था।  
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जिले के पट्टी तहसील के गजरिया गांव के रहने वाले वैभव मिश्रा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई ठाकुर श्यामसुंदर सिंह स्कूल से की। हाईस्कूल रामराज इंटर कालेज पट्टी से किया। इंटर की पढ़ाई रामअजोर इंटर कालेज लालगंज से पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए वह प्रयागराज चले गए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने जेआरएफ की परीक्षा निकाली। 2008 में वह पीसीएस की परीक्षा में टॉपर बने। एसडीएम की ट्रेनिंग लेने के बाद कई जिलों में नौकरी करते हुए वह बांदा पहुंचे।

जहां अवैध खनन करने वालों पर शिकंजा कसा। इसके कुछ दिनों बाद ही उनका तबादला हो गया। मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान अतिक्रमण हटाते को लेकर उनका भाजपा विधायक के बेटे से विवाद हो गया। इसके बाद वहां से भी उनका स्थानांतरण कर दिया गया। इलाहाबाद में सिटी मजिस्ट्रेट रहने के दौरान भी वह चर्चा में रहे। प्रमोशन मिलने पर वह लखनऊ एडीएम सिटी के पद पर तैनात किए गए। मंगलवार को उन्होंने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को प्रयागराज जाने के दौरान एयरपोर्ट पर रोक लिया। तमाम विरोध के बावजूद वह अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करते नजर आए। बुधवार को गजरिया के रहने वाले लोग वैभव के किस्से लोगों को सुनाते रहे।  
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पिता आर्मी में अफसर थे, मां आंगनबाड़ी सहायिका 
गजरिया निवासी एडीएम वैभव मिश्रा के पिता एसपी मिश्रा भारतीय सेना में वारंट अफसर थे। चार भाई बहनों में वैभव सबसे छोटे थे। जब वह 5 साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया। सिर से पिता का साया छीनने के बाद वैभव ने कुछ बनने की ठानी थी। उनकी मां शैल कुमारी गांव में ही आंगनबाड़ी सहायिका हैं।
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