प्रतापगढ़। अक्षय नवमी यानी आंवला नवमी पर संतों और गृहस्थों ने आंवला वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर पूजन-अर्चन किया और सुख-शांति की कामना की। श्रद्धालुओं ने वृक्ष के नीचे भोजन पकाया और परिजनों तथा साथियों के साथ मिलकर अमृतमयी प्रसाद ग्रहण किया।
पुराणों में कहा गया है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी यानी अक्षय नवमी, जिसे आंवला नवमी के नाम से भी जाना जाता है, के दिन आंवला के वृक्ष से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन न सिर्फ आंवला की पूजा का महत्व है बल्कि वृक्ष के नीचे भोजन पकाकर ग्रहण करने से व्यक्ति सभी रोगों से मुक्त हो जाता है। इसका कारण वृक्ष से बरसने वाले अमृत की बूंदों का अंश भोजन में गिरना बताया गया है। इसी मान्यता के चलते बृहस्पतिवार को प्रतापगढ़ में तमाम लोगों ने आंवला वृक्ष का पूजन किया और पेड़ की छांव में भोजन पकाकर परिजनों और सगे-संबंधियों के साथ ग्रहण किया।
चिलबिला स्थित सच्चा आश्रम में भी महंत मनोज ब्रह्मचारी ने स्वयं आंवला वृक्ष के नीचे भोजन पकाया और शिष्यों को आमंत्रित कर प्रसाद ग्रहण कराया। इससे पहले उन्होंने वृक्ष की विष्णु के स्वरूप में पूजा भी की। कार्यक्रम में आश्रम के बच्चे और आसपास के भी तमाम लोग शामिल थे। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह कार्यक्रम धूमधाम के साथ आयोजित किया गया। तमाम गृहस्थों ने आंवला के पेड़ की पूजा की और उसकी छाया में भोजन पकाकर परिजनों के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। कोहंडौर, पट्टी, रानीगंज, दुर्गागंज, लालगंज, मानधाता, गड़वारा, अंतू आदि स्थानों पर भी आंवला नवमी पर वृक्ष के पूजन और छाया में भोजन ग्रहण करने के कार्यक्रम हुए।