प्रतापगढ़। ‘बाल पोषण पुनर्वास’ केंद्र प्रदेश के कुल 26 जिलों में हैं। उनमें एक प्रतापगढ़ भी है। जिला अस्पताल में यह केंद्र खोला गया। यहां अति कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने की व्यवस्था है। तीमारदार समेत सभी को पैसा मिलने का प्राविधान है। फिर भी केंद्र में बच्चे नहीं आ रहे जबकि रजिस्टर पर हर माह दस से बारह बच्चों की सेहत संवर रही है। प्रचार के अभाव में यहां योजना दम तोड़ रही है।
‘बाल पोषण पुनर्वास’ केंद्र में कुपोषित बच्चों को 14 दिन रख कर उनके इलाज की व्यवस्था है। योजना के तहत बच्चे को केंद्र लाने से ले जाने तक का पैसा सरकार देगी। यहां तक कि उसे लाने वालों व उसकी देख करने वाले को भी पैसा दिए जाने का विधान है। इसके बाद भी केंद्र में एक भी कुपोषित बच्चा नहीं हैं जबकि कुपोषित बच्चों को केंद्र लाने के लिए आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को लगाया गया है। उन्हें भी इस काम के लिए पैसा मिलता है। इसके बाद भी केंद्र में मासूमों के लिए जीवनदायिनी यह योजना दम तोड़ रही है। यह स्थितियां प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोल रही हैं। अफसरों का कहना है कि कुपोषित बच्चों को लाने में लोग दिलचस्पी नहीं ले रहे। दरअसल जब योजना की जानकारी ही उन्हें नहीं है तो वे बच्चों को केंद्र लाएं कहां से। ऐसा विभाग के ही कुछ लोगों का मानना है। केंद्र में तैनात न्यूट्रीशियन सहित अन्य कर्मियों का मानदेय भी कई माह से फंसा है।
बाल विकास केंद्रों की रिपोर्ट पर गौर करें तो अब तक 91 बच्चे अति कुपोषित दर्ज किए गए हैं। यदि उन्हें केंद्र में भर्ती करा दिया जाए तो उनकी सेहत सुधर सकती है। उनके अतिरिक्त 28 हजार 599 के करीब ऐसे बच्चे हैं जो कुपोषित तो हैं, मगर ज्यादा नहीं। 55 हजार 592 बच्चों में कुपोषण के लक्षण पाए गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि एक लाख 60 हजार 41 बच्चे तंदरुस्त हैं। इसके बाद भी आशा, एएनएम व कार्यकत्रियां उन बच्चों को केंद्र में नहीं ला रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम आरबी यादव का कहना है कि योजना का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इसके बाद भी लोग बच्चों की सेहत के प्रति संजीदा नहीं हैं। जितने बच्चे आए हैं उनका उपचार कर स्वस्थ बनाया गया है। पूरी तरह सफलता के लिए प्रयास अब भी जारी हैं।