जिले के 4वजीफा के लिए आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र बनवाकर आनलाइन आवेदन करने के बाद भी जिले के 4331 छात्र-छात्राओं को वजीफा नहीं मिल सका। विभाग के मानक पर खरे उतरने के बाद भी इन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं दी गई। जबकि हजारों विद्यार्थियों को डाटा फीडिंग में कमी दिखाकर वजीफा नहीं दिया गया है।
कोरोना काल में गरीब बच्चों से समाज कल्याण विभाग ने किनारा काट लिया है। वैसे तो छात्रवृत्ति को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जिन विद्यार्थियों का डाटा पूरी तरह दुरुस्त था, उन्हें भी वजीफा नहीं दिया गया है। पूर्व दशम और दशमोत्तर के 4331 छात्र-छात्राएं वजीफा के लिए पात्र थे और उनका डाटा भी सही था। मगर, विभाग के पास बजट नहीं होने के कारण उन्हें छात्रवृ त्ति नहीं दी गई।
पूर्व दशम में अनुसूचित जाति के 507 और सामान्य वर्ग के 179 और दशमोत्तर वर्ग में अनुसूचित जाति के 1088 और सामान्य वर्ग के 2560 ऐसे छात्र-छात्राएं हैं, जिन्हें अभी तक वजीफा नहीं मिला है। अब मिलने की उम्मीद भी नहीं है। जबकि हजारों छात्र-छात्राओं का डाटा ऑनलाइन फीडिंग और अभिलेखों से भिन्न बताकर विभाग ने वजीफा देने से हाथ खड़ा कर दिए हैं। वजीफा नहीं पाने वाले विद्यार्थी इन दिनों समाज कल्याण विभाग का चक्कर लगा रहे हैं, मगर अधिकारी कुछ भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
छात्रवृत्ति को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। हम लोगों से कोई मतलब नहीं होता है। निदेशालय में बैठे अफसर पूरी मॉनीटरिंग करते हैं। जिन लोगों को वजीफा नहीं मिला है, उनके लिए अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है।
राजीव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी