खेलने-खाने की उम्र में जिले के 22 बच्चे दिल की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। एक से तेरह साल के इन बच्चों के दिल में छेद है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की जांच के बाद इसका खुलासा हुआ। स्वास्थ्य विभाग इनका किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में ऑपरेशन कराएगा।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में बच्चों की जांच करने के लिए प्रत्येक सीएचसी में डाक्टरों की दो टीमों का गठन किया गया है। एक टीम में डॉ. समेत चार कर्मचारी हैं। इन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक, जूनियर और इंटर कालेजों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 22 बच्चे ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके दिल में छेद है। इससे उनकी जान को भी खतरा है।
मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद इन बच्चों को ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया है। आरबीएसके( राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम अब लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में इनका ऑपरेशन कराएगी। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि छह साल पहले 170 बच्चे चिन्हित किए गए थे, जिनका सफल ऑपरेशन भी हो चुका है। जिले में अबतक कुल 192 बच्चों में दिल की छेद की बीमारी पाई गई है।
इन बच्चों के दिल में है छेद
डीपीएम राजशेखर ने बताया कि पुरैली के राज सिंह, नौबस्ता की सुप्रिया, सराय बीरभद्र के अतीफ और आदित्य, जोगापुर के युगराज, कमईपुर के शिवाली, भुपियामऊ के समृद्ध, मंगरौरा के संजीव, आसपुर देवसरा के रीतेश, जैतीपुर कठार के लक्ष्मी समेत 22 बच्चों के दिल में छेद है।
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आरबीएसके टीम दिल में छेद वाले बच्चों को खोजकर इलाज करवा रही है। टीम में शामिल शैलेश दूबे, सीएम शुक्ल और डिप्टी सीएमओ डॉ. एस हैदर की निगरानी में बच्चों को चिन्हित कर लखनऊ में इलाज कराया जा रहा है।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ