प्रतापगढ़। बिजली से वंचित मजरों को रोशन करने के लिए शुरू की गई सौभाग्य योजना जिले में साकार नहीं हो सकी। कार्यदायी संस्था की लापरवाही से विद्युतीकरण पूरा नहीं हो सका। जिले में 2090 मजरे अभी भी बिजली से वंचित हैं। गर्मी से पहले इन्हें रोशन करने का दावा किया गया था, मगर कुछ नहीं हो सका। विद्युतीकरण न होने से मजरों के लोग गर्मी में परेशान हैं।
बिजली से वंचित मजरों को रोशन करने के लिए सौभाग्य योजना की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2018 में योजना के तहत बिजली से वंचित मजरों को चिह्नित किया गया। जिले में ऐसे लगभग छह हजार मजरों की सूची तैयार की गई। विद्युतीकरण के लिए 398 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। बजाज कंपनी को विद्युतीकरण की जिम्मेदारी मिली। शुरुआती दौर में तेजी से काम चला, लेकिन बाद में ठेकेदार लापरवाही बरतने लगे। टाइम लाइन नजदीक आने पर अफसरों ने जांचकर फटकार लगाई तो काम में तेजी आई, मगर इसके बाद भी 2500 हजार से अधिक मजरों का कार्य पूरा नहीं हो सका।
इनमें करीब 500 मजरे ऐसे थे, जहां उपकरणों के अभाव में बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पा रही थी। जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद अफसरों ने इसकी जांच शुरू की, तो कार्यदायी संस्था की पोल खुल गई। वाराणसी व लखनऊ से आए अफसरों ने ठेकेदारों को जमकर फटकार लगाई। गर्मी से पहले विद्युतीकरण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया, मगर इसके बाद भी काम अधूरा रह गया। लापरवाही व अफसरों की उदसीनता के कारण अब बिजली से वंचित मजरों के लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी दूसरे मजरों में जाना पड़ता है। इसे लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों से भी लोगों ने शिकायत की, मगर कुछ नहीं हो सका। अधीक्षण अभियंता सत्यपाल ने बताया कि जहां कार्य अधूरा था, उसे पूरा कर लिया गया है। बिजली से वंचित 2090 मजरों की सूची तैयार की गई है। प्रस्ताव भेजा गया है।
पोल खड़े है, तैयार नहीं हो सकी लाइन
भुपियामऊ के पूरे बाछिल गांव में सौभाग्य योजना के तहत विद्युतीकरण का काम पूरा नहीं हो सका। गांव में पोल खड़े है, मगर लाइन तैयार नहीं हो सकी। विभागीय अफसर बिजली से वंचित मजरों में अधूरे पड़े विद्युतीकरण के कार्य को पूरा करने का दावा कर रहे हैं, मगर गांव में सिर्फ पोल गड़े हैं। दो साल बाद भी गांव में बिजली नहीं पहुंची है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से भी की गई है।