शिक्षा विभाग में कई ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास एक से ज्यादा पद हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास काम ही नहीं है।
एक बानगी देखिए, वासुदेव यादव माध्यमिक के साथ बेसिक शिक्षा निदेशक, संजय सिन्हा सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के साथ अपर निदेशक बेसिक।
वहीं डीबी शर्मा संयुक्त निदेशक वित्त व अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक। शैल यादव सचिव संस्कृत शिक्षा के साथ अपर निदेशक व्यावसायिक शिक्षा हैं।
दोनों विभागों में होती है तैनाती
उत्तर प्रदेश में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा अलग-अलग है। पर, अधिकारियों की तैनाती दोनों विभागों में की जाती है। शिक्षा विभाग में सबसे निचला पद बेसिक शिक्षा अधिकारी फिर जिला विद्यालय निरीक्षक का है।
इसके बाद सहायक शिक्षा निदेशक, उप शिक्षा निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक, अपर शिक्षा निदेशक और निदेशक का पद है। प्रदेश में निदेशक स्तर के पांच पद हैं।
इसमें से चार निदेशक स्तर का और एक शासन में विशेष सचिव का है। मौजूदा समय प्रदेश में निदेशक स्तर के चार अधिकारी हैं।
सत्ता बदलते ही शुरू हुआ खेल
प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ ही शिक्षा विभाग में अधिकारियों की तैनाती का खेल शुरू हुआ। उस समय निदेशक स्तर के दो अधिकारियों में संजय मोहन टीईटी धांधली के आरोप में जेल में थे।
दिनेश चंद्र कनौजिया बेसिक के निदेशक थे। सत्ता बदलते ही सबसे पहले दिनेश चंद्र कनौजिया को महत्वहीन पद साक्षरता में भेजा गया।
वासुदेव यादव को पहले माध्यमिक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया और बाद में बेसिक का। शिक्षा विभाग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक अधिकारी को दो महत्वपूर्ण निदेशालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया हो।
प्रमोशन के लिए बदला मानक
चहेतों को मनचाहे पदों पर तैनाती देने के लिए पदोन्नति के मानक बदल दिए गए। पहले निदेशक, बाद में अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक और उप निदेशक के पदों पर पदोन्नतियां दी गईं।