गेहूं कटाई समाप्त हो गई है और अधिकांश किसानों ने गेहूं की ब्रिकी भी कर दी है इसके बावजूद सरकारी गेहूं खरीद के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। खरीद के पहले माह अप्रैल में जहां मात्र 20 हजार मीट्रिक टन खरीद हुई थी वहीं मई के 15 दिनों में यह आंकड़ा एकाएक 60 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया।
तराई के इस जिले में इस बार गेहूं की बम्पर पैदावार हुई है। इसको देखते हुए शासन ने जिले को 2.13 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। प्रारंभ में बीज के नाम पर हुई खरीद के कारण गेहूं के दाम समर्थन मूल्य से ज्यादा रहे इसलिए खरीद नहीं हुई और क्रय केंद्र सूने पड़े रहे। व्यापारियों और बीज निर्माता कंपनियों ने बम्पर खरीद कर अपने गोदाम भर लिए। इस खरीद के साथ ही आढ़तों पर सामान्य खरीद भी चलती रही और अब अधिकांश किसानों का गेहूं बिक चुका है। किसान गेहूं की बिक्री की धान की तैयारी में जुट गया है। इसके उलट सरकारी खरीद के आंकड़े कई गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। अप्रैल माह में जहां जिले की सभी सरकारी एजेंसिया मिलकर मात्र 18 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद सकी वहीं मई के 15 दिनों में इसमें जादुई परिवर्तन आया है। एक मई से 16 मई तक सरकारी खरीद का आंकड़ा एकाएक बढ़कर 60 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया है। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्रों पर आज भी नाममात्र की तौल हो रही है। क्रय केंद्रों की खरीद व्यापारियों से मिलकर कागजों में हो रही है।
चार दिन में 5100
एमटी खरीद
सरकारी अमला जहां अप्रैल के पूरे महीने में मात्र 18 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद सका वहीं 13 से 16 मई के बीच मात्र पांच दिनों 5100 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है।
खरीद में एसएफसी
सबसे आगे
गेहूं खरीद में लगी नौ क्रय एजेंसियों में राशन कोटे को खाद्यान्न सप्लाई की जिम्मा संभाल रही एफएफसी को भी लगाया गया है। अन्य संस्थाओं के मुकाबले एसएफसी खरीद में सबसे आगे है। संस्था को 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था जिसमें 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद जा चुका है जो लक्ष्य का 50 प्रतिशत है। वहीं अन्य एजेंसियों की खरीद 22 से 34 प्रतिशत के बीच हैं। एसएफसी की सबसे अधिक खरीद भी चर्चा का विषय बनी हुई है।